नई दिल्ली, 21वीं अप्रैल 2024: असम पहुंचे गणतांत्रिक छात्र संगठन (AISA) के तीन कार्यकर्ता आज 21वें दिन अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। यह संघर्ष उनकी मांगों को लेकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का एक अहम माध्यम बन गया है। भूख हड़ताल में शामिल इन कार्यकर्ताओं के साथ कुल 21 लोग इस लड़ाई को जारी रखे हुए हैं। डॉक्टरों की सलाह के बावजूद, जो प्रदर्शनकारियों को अधिक से अधिक आराम करने, ऊर्जा बचाने और कम बोलने की हिदायत दे रहे हैं, वे अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए और सरकार को कल्याणकारी नीतियों को तेज़ी से लागू करना चाहिए। तीनों प्रमुख कार्यकर्ता, जो इस भूख हड़ताल में सबसे आगे हैं, उन्होंने संघर्ष के दौरान अपने कठिनाइयों और चुनौतियों की बात की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न हो सकने के बावजूद वह अपने मूल उद्देश्य से डिगेंगे नहीं।
डॉक्टरों ने प्रदर्शनकारियों को लगातार जांच में रखा है और बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति सचेत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूख हड़ताल का यह तंत्र लंबे समय तक चलना स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। बावजूद इसके, प्रदर्शनकारियों की हिम्मत और समर्थन उनमें नई ऊर्जा भर रहा है।
समाज के विभिन्न वर्गों और राजनीतिक दलों से भी इस भूख हड़ताल के समर्थन में आवाजें उठ रही हैं। कई मानवाधिकार संगठन भी सरकार से अपील कर रहे हैं कि वे प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करें और जल्द समाधान निकालें ताकि इस संघर्ष को समाप्त किया जा सके।
इस भूख हड़ताल ने न केवल सामाजिक न्याय के मुद्दों को उजागर किया है, बल्कि युवा activists के दृढ़ संकल्प का भी परिचय दिया है। सरकार की प्रतिक्रिया और आगामी कदम इस संघर्ष की दिशा निर्धारित करेंगे। फिलहाल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की निगरानी में प्रदर्शनकारियों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
वर्तमान में, सभी की निगाहें इस भूख हड़ताल के परिणाम पर टिकी हुई हैं, जो देश में सामाजिक, राजनीतिक और स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती को दर्शाता है।













