July 22, 2026 4:35 am

उच्च शिक्षा में छात्रों को मार्गदर्शन क्यों आवश्यक है

Why mentoring students in higher education is important

उच्च शिक्षा में मेंटरिंग का महत्व: छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक कदम

देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छात्र केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विकास की भी आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। इसी क्रम में मेंटरिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेंटरिंग से छात्र न केवल अपनी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, बल्कि वे मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत बनते हैं।

मेंटरिंग प्रणाली के तहत अनुभवी शिक्षक या मार्गदर्शक छात्रों को उनके शैक्षणिक, करियर और जीवन कौशल संबंधी समस्याओं में सहायता करते हैं। यह प्रक्रिया छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है तथा उन्हें सही दिशा में प्रेरित करती है। उच्च शिक्षा संस्थानों में नियमित मेंटोरिंग प्रोग्राम्स शुरू करने की आवश्यकता इसलिए भी महसूस की जा रही है ताकि छात्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।

आमेरिकन एजुकेशनल रिसर्च एसोसिएशन के एक अध्ययन के अनुसार, जिन छात्रों को मेंटरिंग उपलब्ध कराई जाती है, उनकी अकादमिक सफलता दर 30% अधिक होती है। इसके अतिरिक्त, वे भावात्मक तनाव को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं और सामाजिक सम्बन्धों का निर्माण भी बेहतर तरीके से करते हैं। जिससे उनका समग्र विकास होता है।

भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में भी मेंटरिंग प्रोग्राम को बढ़ावा दिया जा रहा है। कुछ संस्थान इसके तहत नियमित काउंसलिंग सेशन्स, कार्यशालाएं और पर्सनल डेवलेपमेंट प्रोग्राम आयोजित करते हैं। यह कदम छात्रों की निजी समस्याओं को समझने और उन्हें समाधान प्रदान करने में सहायक साबित होता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि हर उच्च शिक्षा संस्थान को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी और मेंटरिंग को एक औपचारिक व्यवस्था के तौर पर स्थापित करना होगा। इसके लिए प्रशिक्षित मेंटर्स की नियुक्ति, छात्रों की आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रमों का आयोजन और मेंटोर-मेंटी के बीच बेहतर संवाद प्रणाली विकसित करना जरूरी है।

इस संदर्भ में शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनके तहत संस्थानों को मेंटरिंग प्रणाली को लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और परिणाम दोनों में सुधार होगा।

इस प्रकार, मेंटरिंग को उच्च शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाना न केवल छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए आवश्यक है, बल्कि उनके व्यक्तिगत और पेशेवर विकास के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। यह कदम भारत के शैक्षिक क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

Source