जयपुर से: डॉ. बी.आर. अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षा एवं कानून की प्रगति पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रोफेसर देविन्दर सिंह ने कहा कि कानून का शासन, समान अवसरों की उपलब्धता और समावेशी विकास लोकतांत्रिक समाजों की नींव हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे संविधान के मूल्यों का सम्मान करें और उन्हें दृढ़ता से अपनाएं।
कुलपति देविंदर सिंह ने संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में कहा, “वर्तमान वैश्विक संदर्भ में यह अत्यंत आवश्यक है कि हम संविधान में निहित अधिकारों और कर्तव्यों को समझें और उनका पालन करें। हमारा राष्ट्रीय विकास तभी संपूर्ण और सुदृढ़ हो सकता है जब हर नागरिक को समान अवसर मिले और कानून सभी के लिए समान रूप से लागू हो।”
उन्होंने आगे बताया कि विशेष रूप से युवा वर्ग को संविधान से जुड़ी बुनियादी समझ विकसित करनी चाहिए ताकि वे सामाजिक न्याय एवं समानता के मार्ग पर आगे बढ़ सकें। कुलपति ने कहा कि इस प्रकार के संगोष्ठी छात्रों को न केवल ज्ञानवर्धन का अवसर देते हैं बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।
इस संगोष्ठी में विभिन्न कानूनी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय अतिथियों ने भाग लिया। विभिन्न सत्रों में न्यायपालिका के समक्ष आने वाली चुनौतियों, मानवाधिकारों की रक्षा, और कानूनी शिक्षा में नवाचार जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रमुख वक्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े ताजा अनुभव और शोध प्रस्तुत किए, जिससे आने वाली पीढ़ी को समझने और सीखने में सहायता मिलेगी।
संगोष्ठी का प्रमुख उद्देश्य छात्रों एवं शोधकर्ताओं को वैश्विक कानूनी प्रथाओं से अवगत कराना और उन्हें प्रेरित करना था ताकि वे देश की प्रगति में अपना योगदान दे सकें। डॉ. बी.आर. अम्बेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने इस आयोजन के माध्यम से एक बार फिर साबित कर दिया कि वह साहित्यिक एवं अकादमिक क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
अंत में कुलपति ने कहा, “हमारा कर्तव्य है कि हम अपने लोकतांत्रिक संविधान के प्रति प्रतिबद्ध रहें और समाज की उन्नति के लिए कानून का सम्मान करें। विशेषकर युवा वर्ग को चाहिए कि वे संविधान के आदर्शों को जीवन का हिस्सा बनाएं। यह केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक समृद्ध और न्यायसंगत समाज के निर्माण की नींव है।”
संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए विश्वविद्यालय के सभी विभागों और आयोजकों ने समर्पित प्रयास किए, जिनके प्रति आयोजक सदेव आभार व्यक्त करते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों से कानून के क्षेत्र में गुणवत्ता और सक्रियता बढ़ती है, तथा छात्रों में जागरूकता एवं सामाजिक जिम्मेदारी की भावना प्रबल होती है।













