September 22, 2026 4:43 pm

भगवंत मान: कॉमेडी की दुनिया से पंजाब के मुख्यमंत्री तक का सफर

भगवंत मान कॉमेडी की दुनिया से पंजाब के मुख्यमंत्री तक का राजनीतिक सफर

भगवंत मान पंजाब की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े मान ने राजनीति में आने से पहले कॉमेडी और मनोरंजन की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति का रुख किया और लोकसभा सांसद से होते हुए पंजाब के 17वें मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे। उनका राजनीतिक सफर इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के बजाय मनोरंजन की दुनिया से सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और धीरे-धीरे पंजाब की राजनीति में अपनी जगह बनाई।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

भगवंत मान का जन्म 17 अक्टूबर 1973 को पंजाब के संगरूर जिले के सतौज गांव में हुआ। उनके पिता शिक्षक थे। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा चीमा गांव के सरकारी स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने सुनाम के शहीद उधम सिंह कॉलेज से वाणिज्य विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन से ही उनकी रुचि मंच और हास्य कार्यक्रमों में दिखाई देने लगी थी। राजनीति में आने से पहले उन्होंने कॉमेडी के क्षेत्र में काम किया और पंजाबी मनोरंजन जगत में अपनी पहचान बनाई।

कॉमेडी से मिली पहचान

राजनीति में आने से पहले भगवंत मान एक लोकप्रिय कॉमेडियन के रूप में जाने जाते थे। वे ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ जैसे कार्यक्रमों में नजर आए और पंजाबी फिल्मों में भी काम किया। उन्होंने कई हास्य एल्बम और कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों का मनोरंजन किया। उनकी लोकप्रियता खास तौर पर पंजाबी दर्शकों के बीच रही। मनोरंजन की दुनिया में मिली पहचान ने उन्हें आम लोगों के बीच एक जाना-पहचाना चेहरा बनाया। उनके कॉमेडी करियर में कुल्फी गरमा-गरम, भगवंत मान मोस्ट वांटेड, हास हास के और जस्ट लाफ बाकी माफ जैसे एल्बम शामिल रहे।

राजनीति में कैसे हुई एंट्री?

भगवंत मान ने वर्ष 2011 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। शुरुआत में वे मनप्रीत सिंह बादल की पंजाब पीपल्स पार्टी से जुड़े। वर्ष 2012 में उन्होंने लेहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।  इसके बाद उनके राजनीतिक जीवन में बड़ा बदलाव आया। मार्च 2014 में वे आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और संगरूर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। उन्होंने इस चुनाव में जीत हासिल कर संसद में प्रवेश किया। यह जीत उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।

लोकसभा सांसद से बने मजबूत राजनीतिक चेहरा

2014 के लोकसभा चुनाव में संगरूर से जीत दर्ज करने के बाद भगवंत मान राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हुए। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर संगरूर से जीत हासिल की। 2019 के बाद वे लोकसभा में आम आदमी पार्टी के एकमात्र सांसद रहे। संसद में उनकी सक्रियता और पंजाब में बढ़ती लोकप्रियता ने उन्हें पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल कर दिया।

2022 में मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे

भगवंत मान के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा पड़ाव 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव रहा। आम आदमी पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया। उन्होंने धुरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और 58,206 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया और राज्य में सरकार बनाने में सफल रही। इसके बाद भगवंत मान ने पंजाब के 17वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनका शपथ ग्रहण समारोह शहीद भगत सिंह के पैतृक गांव खटकड़ कलां में आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री बनने के साथ ही उनके सामने पंजाब के प्रशासन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और राज्य की आर्थिक स्थिति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चुनौतियां आईं।

निजी जीवन भी रहा चर्चा में

भगवंत मान के निजी जीवन को लेकर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है। उन्होंने 7 जुलाई 2022 को डॉ. गुरप्रीत कौर से विवाह किया। इससे पहले उनका विवाह इंद्रप्रीत कौर से हुआ था और दोनों का तलाक हो चुका है। उनके पहले विवाह से एक बेटा और एक बेटी हैं। दूसरी शादी के बाद उनके परिवार में एक बेटी का भी जन्म हुआ।

राजनीतिक सफर एक नजर में

  • 17 अक्टूबर 1973: संगरूर के सतौज गांव में जन्म
  • 2011: सक्रिय राजनीति में प्रवेश
  • 2012: लेहरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा
  • 2014: संगरूर से पहली बार लोकसभा सांसद बने
  • 2019: संगरूर से दूसरी बार लोकसभा सांसद चुने गए
  • 2022: धुरी विधानसभा सीट से चुनाव जीते
  • 2022: पंजाब के 17वें मुख्यमंत्री बने
  • 7 जुलाई 2022: डॉ. गुरप्रीत कौर से विवाह

भगवंत मान का सफर मनोरंजन की दुनिया से राजनीति और फिर पंजाब के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने की कहानी है। कॉमेडियन के रूप में लोगों के बीच लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। शुरुआती चुनावी असफलता के बावजूद उन्होंने अपना राजनीतिक सफर जारी रखा और 2014 में पहली बार लोकसभा पहुंचे।
लगातार दो बार सांसद बनने के बाद 2022 में उन्होंने पंजाब विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की और मुख्यमंत्री बने। उनका राजनीतिक सफर यह दिखाता है कि सार्वजनिक जीवन में अलग पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी लगातार प्रयास और राजनीतिक सक्रियता के जरिए बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है।

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