July 22, 2026 4:41 am

सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की CBSE OSM गड़बड़ियों को लेकर सरकार से रिपोर्ट मांगी, जताई नाराजगी

Supreme Court raises students’ ‘frustration’ over CBSE OSM glitches with Govt., seeks status report

नई दिल्ली। देश के प्रमुख शिक्षा बोर्ड CBSE के ऑनलाइन सिस्टम (OSM) में आई गड़बड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इस संदर्भ में सरकार से स्थिति की पूरी रिपोर्ट तलब की है और कहा है कि इस मामले में व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। यह मामला न केवल भारत के लाखों छात्रों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि विदेशों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि ऑनलाइन सिस्टम में हुई ये तकनीकी खामियां छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं। याचिका में आरोप है कि यह ‘सिस्टेमैटिक नेग्लिजेंस’ और ‘ड्यूटी ऑफ केयर’ का उल्लंघन है, जिससे छात्रों को भारी नुकसान पहुंचा है। कोर्ट ने इस मामले में सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि इस तरह की असफलता क्यों हुई और किस स्तर तक इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी।

याचिका में विशेष रूप से यह बताया गया है कि बोर्ड की तरफ से समय पर सुधार नहीं किए जाने से लाखों छात्रों को उनके रिजल्ट, एडमिट कार्ड और परीक्षा से संबंधित अन्य आवश्यक दस्तावेजों में भारी परेशानी हुई है। इसके कारण कई छात्र अपनी पढ़ाई और करियर के फैसलों में अड़चन का सामना कर रहे हैं। यह स्थिति बोर्ड की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाने वाली है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि गड़बड़ी केवल छात्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके अभिभावकों के लिए भी चिंता का विषय बनी है। कई अभिभावकों ने बताया है कि इस तकनीकी विफलता की वजह से उन्हें मानसिक तनाव के साथ-साथ आर्थिक बोझ का भी सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण कुछ छात्रों के कैरियर में अनिश्चितता उत्पन्न हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले में त्वरित कदम उठाएं और ऑनलाइन सिस्टम को स्थायी और विश्वसनीय बनाने के लिए आवश्यक तकनीकी सुधार करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके। कोर्ट ने यह भी कहा है कि जवाबदेही तय करना जरूरी है ताकि इस प्रकार की लापरवाहियां फिर से न हों।

इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि भारत के शैक्षिक संस्थानों में डिजिटलरण के साथ होने वाली तकनीकी समस्याएं सीधे तौर पर छात्रों और उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं। बेहतर प्रबंधन और जवाबदेही के अभाव में इस तरह की त्रुटियों का प्रभाव वर्षों तक रह सकता है।

आगामी हफ्तों में इस मामले की आगे की सुनवाई में कोर्ट द्वारा सरकार और CBSE के उच्च अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी, जिससे समस्या का समाधान निकाला जा सके। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों की नजरें इस मामले पर बनी हुई हैं, क्योंकि देश के शैक्षिक प्लेटफार्म की विश्वसनीयता पर यह बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

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