July 22, 2026 4:39 am

कक्षा 9 में तीसरी भाषा शुरू न हो, बल्कि पूरी हो: न्यायमूर्ति नगरथना ने सरकार को निर्देश दिया

Third language must stop in Class 9, not start in Class 9, Justice Nagarathna tells government

नई दिल्ली: भारत में शिक्षा प्रणाली में भाषा अध्ययन को लेकर पुनर्विचार की जरूरत को लेकर न्यायमूर्ति नगरथना ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि तीसरी भाषा की शुरुआत कक्षा 9 में नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे पहले से शुरू करना चाहिए ताकि छात्रों पर अनावश्यक तनाव न पड़े।

न्यायमूर्ति नगरथना ने सवाल उठाया है, “तीसरी भाषा कक्षा 9 में क्यों शुरू करनी है? इससे छात्रों के लिए अत्यधिक बोझ बन जाता है। इसके बजाय इसे कक्षा 6 में शुरू करना कहीं अधिक उपयुक्त होगा।” उनका मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की मानसिक सेहत को ध्यान में रखते हुए भाषा शिक्षण की प्रणाली में सुधार आवश्यक है।

भारत के शिक्षा तंत्र में तीन भाषाओं की नीति लागू है, जिसमें मातृभाषा, राजकीय भाषा और तीसरी भाषा शामिल होती है। हालांकि, तीसरी भाषा की शुरुआत कक्षा 9 में कराना छात्रों पर अतिरिक्त दबाव डालता है क्योंकि उस समय वे अन्य नये विषयों के साथ ही परीक्षाओं और करियर संबंधी तैयारियों में व्यस्त रहते हैं।

वहीं, शिक्षा विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि भाषा की शिक्षा को शुरुआती कक्षाओं में शुरू किया जाना चाहिए ताकि बच्चे उसे आत्मसात कर सकें और बाद में उसका दवाब न महसूस करें।

न्यायमूर्ति नगरथना के इस सुझाव को कई शिक्षाविदों का समर्थन प्राप्त हो रहा है, जो मानते हैं कि शिक्षा नीति में इस तरह के समायोजन से छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा और वे अधिक फलदायी शिक्षा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।

सरकार से आग्रह किया जा रहा है कि वह इस विषय पर विचार करें और कक्षा 6 से तीसरी भाषा की शुरुआत को अनिवार्य करें। यह न केवल छात्रों के लिए बेहतर होगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की बहुभाषी ताकत को भी मजबूत करेगा।

कुल मिलाकर, न्यायमूर्ति नगरथना की यह टिप्पणी शिक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के हित में एक आवश्यक कदम के रूप में देखी जा रही है। यह पहल शिक्षा के तनाव को कम करने और बेहतर सीखने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।

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