नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026: भारत की सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री अब सिर्फ योजनाओं और निवेश घोषणाओं तक सीमित नहीं रह गई है। देश में सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स अब जमीन पर आगे बढ़ रहे हैं और कुछ सुविधाओं में कमर्शियल प्रोडक्शन भी शुरू हो चुका है। SEMICON India 2026 के उद्घाटन के मौके पर माइक्रोन टेक्नोलॉजी के चेयरमैन और CEO संजय मेहरोत्रा ने भी भारत की इस प्रगति को रेखांकित किया।माइक्रोन का गुजरात के Sanand में सेमीकंडक्टर ATMP (Assembly, Test, Marking and Packaging) प्लांट फरवरी 2026 में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर चुका है। कंपनी के अनुसार, 2026 में यहां दसियों मिलियन मेमोरी चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग होगी, जबकि 2027 तक क्षमता को बढ़ाकर सैकड़ों मिलियन चिप्स तक ले जाने की योजना है।भारत के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अब सिर्फ सेमीकंडक्टर का बड़ा उपभोक्ता बाजार बने रहने के बजाय इसके निर्माण और सप्लाई चेन में भी अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
माइक्रोन का Sanand प्लांट: भारत के लिए क्यों अहम है?
गुजरात के Sanand में Micron Technology की सुविधा भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के महत्वपूर्ण शुरुआती प्रोजेक्ट्स में शामिल है। इस प्लांट में DRAM और NAND से जुड़े मेमोरी प्रोडक्ट्स की असेंबली और टेस्टिंग की जाती है।सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन में चिप के निर्माण के बाद उसकी असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग भी महत्वपूर्ण चरण होते हैं। Sanand प्लांट इसी क्षेत्र में भारत की क्षमता को मजबूत करता है।इस प्रोजेक्ट में ₹22,516 करोड़ का निवेश किया गया है और यह India Semiconductor Mission के तहत मंजूर किए गए शुरुआती प्रमुख प्रोजेक्ट्स में शामिल था।फरवरी 2026 में इस सुविधा से कमर्शियल प्रोडक्शन और भारत में बने मेमोरी मॉड्यूल की पहली शिपमेंट शुरू होने की जानकारी दी गई थी।कंपनी की योजना के अनुसार, 2026 में यहां दसियों मिलियन चिप्स की असेंबली और टेस्टिंग की जाएगी। इसके बाद 2027 में उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर सैकड़ों मिलियन चिप्स तक ले जाने का लक्ष्य है।
SEMICON India 2026: थीम है “Silicon to Systems”
SEMICON India 2026 का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि में किया जा रहा है। इस साल की थीम है:
“Silicon to Systems: Building the Ecosystem”
कार्यक्रम में 600 से ज्यादा एग्जिबिटर्स, 300 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कंपनियां और 52 देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।इस आयोजन का फोकस केवल सेमीकंडक्टर चिप बनाने तक सीमित नहीं है। भारत अब चिप डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग, उपकरण, मटीरियल्स और स्किल्ड टैलेंट तक पूरे इकोसिस्टम को विकसित करने पर जोर दे रहा है।
इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- चिप डिजाइन
- सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग
- एडवांस्ड पैकेजिंग
- टेस्टिंग
- सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट
- मटीरियल्स
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट
- स्किल्ड टैलेंट
इसका मतलब है कि भारत की रणनीति अब केवल कुछ बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित करने के बजाय पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन तैयार करने की दिशा में है।
2021 से 2026 तक भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा
भारत की मौजूदा सेमीकंडक्टर रणनीति की शुरुआत 2021 में Semicon India Programme के साथ हुई थी। इसके लिए ₹76,000 करोड़ का बजट रखा गया था।इसके बाद जुलाई 2026 में Semicon 2.0 को मंजूरी दी गई, जिसके लिए ₹1,27,500 करोड़ का बजट रखा गया है।
Semicon 2.0 के छह प्रमुख क्षेत्र हैं:
- चिप डिजाइन
- सेमीकंडक्टर उपकरण और मटीरियल्स
- सेमीकंडक्टर फैब्स
- एडवांस्ड पैकेजिंग
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट
- टैलेंट डेवलपमेंट
इसके अलावा भारत में अब तक 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। ये परियोजनाएं 6 राज्यों में फैली हैं और इनमें ₹1.64 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश की प्रतिबद्धता बताई गई है।
दिए गए विवरण के अनुसार Micron, Kaynes Technology और CG Power से जुड़ी सुविधाएं कमर्शियल प्रोडक्शन के चरण तक पहुंच चुकी हैं।
भारत में बन रहे बड़े सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट
| कंपनी | लोकेशन | निवेश | प्रोजेक्ट | स्थिति |
| Micron Technology | Sanand, Gujarat | ₹22,516 करोड़ | DRAM/NAND मेमोरी, ATMP | फरवरी 2026 से प्रोडक्शन |
| Tata Electronics | Dholera, Gujarat | ₹91,000 करोड़ | 28-110nm चिप्स | निर्माणाधीन |
| CG Power | Sanand, Gujarat | ₹22,000+ करोड़ | डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर्स | निर्माणाधीन |
| Kaynes Technology | Sanand, Gujarat | ₹3,000+ करोड़ | एडवांस्ड पैकेजिंग/OSAT | मार्च 2026 से प्रोडक्शन |
| Fujifilm | Gujarat | ₹800 करोड़ | सेमीकंडक्टर मटीरियल्स | 2028 से प्रोडक्शन |
इन परियोजनाओं की खासियत यह है कि भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर के अलग-अलग हिस्सों पर एक साथ काम किया जा रहा है। कहीं फैब्रिकेशन क्षमता तैयार हो रही है तो कहीं एडवांस्ड पैकेजिंग और मटीरियल्स की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
Tata का Dholera फैब भी बड़ी कड़ी
गुजरात के Dholera में Tata Electronics का सेमीकंडक्टर फैब प्रोजेक्ट भी भारत की चिप निर्माण रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस परियोजना में करीब ₹91,000 करोड़ के निवेश की जानकारी दी गई है।इस फैब में 28nm से 110nm तक के चिप्स के निर्माण पर फोकस है। इनका इस्तेमाल ऑटोमोटिव, इंडस्ट्रियल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक एप्लिकेशन में किया जा सकता है।अगर Sanand में Micron की सुविधा असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग क्षमता को मजबूत करती है, तो Dholera का Tata फैब भारत में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग ने तैयार किया आधार
भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश के पीछे देश में पिछले वर्षों में विकसित हुआ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग बेस भी महत्वपूर्ण है।
दिए गए PIB आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन तेजी से बढ़ा।
- इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन: ₹1.9 लाख करोड़ से बढ़कर ₹13.11 लाख करोड़
- मोबाइल फोन प्रोडक्शन: ₹18,000 करोड़ से बढ़कर ₹6.27 लाख करोड़
- मोबाइल फोन एक्सपोर्ट: ₹1,500 करोड़ से बढ़कर ₹2.59 लाख करोड़
- 2025-26 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी एकल एक्सपोर्ट कमोडिटी
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से करीब 25 लाख नौकरियों को समर्थन
इसके अलावा देश में इस्तेमाल होने वाले 99.2% मोबाइल फोन भारत में बनाए जाते हैं।
यह इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा आधार तैयार करती है। मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, कंप्यूटर, डेटा सेंटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने के साथ चिप्स और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की मांग भी बढ़ती है।
Pax Silica Coalition से जुड़ाव
भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति केवल घरेलू उत्पादन तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर भी सेमीकंडक्टर और सिलिकॉन सप्लाई चेन को लेकर रणनीतिक साझेदारियां महत्वपूर्ण हो रही हैं।दिए गए कंटेंट के अनुसार India AI Impact Summit 2026 में भारत Pax Silica Coalition में शामिल हुआ। इस पहल का उद्देश्य ग्लोबल सिलिकॉन सप्लाई चेन को मजबूत करना और रणनीतिक निर्भरता को कम करना है।सेमीकंडक्टर उद्योग में यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चिप बनाने के लिए केवल एक देश पर निर्भर रहना संभव नहीं होता। इसमें डिजाइन, उपकरण, मटीरियल, निर्माण, पैकेजिंग और दूसरे तकनीकी चरणों में कई देशों की भागीदारी होती है।
भारत के सामने अब अगली चुनौती क्या है?
भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शुरुआती आधार तैयार करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब अगला चरण इन अलग-अलग परियोजनाओं को एक मजबूत और आपस में जुड़े हुए सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में बदलने का है।सिर्फ फैक्ट्री स्थापित करने से पूरी इंडस्ट्री तैयार नहीं होती। इसके लिए उच्च स्तर के इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ, रिसर्च संस्थान, स्थानीय उपकरण और मटीरियल सप्लायर, डिजाइन कंपनियां, टेस्टिंग सुविधाएं और एडवांस्ड पैकेजिंग क्षमता भी जरूरी होती है।यही वजह है कि Semicon 2.0 और SEMICON India 2026 का फोकस केवल चिप निर्माण पर नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर सिस्टम तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर दिखाई देता है।
विजन से एक्जीक्यूशन तक पहुंचता भारत
SEMICON India 2026 ऐसे समय में हो रहा है जब भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति में शुरुआती प्रोजेक्ट्स उत्पादन के चरण तक पहुंचने लगे हैं।Sanand में Micron का कमर्शियल प्रोडक्शन, Kaynes और CG Power से जुड़ी परियोजनाएं, Dholera में Tata Electronics का फैब और सेमीकंडक्टर मटीरियल्स से जुड़े दूसरे प्रोजेक्ट्स मिलकर भारत के बदलते औद्योगिक परिदृश्य की तस्वीर पेश करते हैं।अब भारत का लक्ष्य केवल चिप्स की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करना नहीं, बल्कि डिजाइन, निर्माण, टेस्टिंग, पैकेजिंग, उपकरण, मटीरियल और प्रतिभा से जुड़ी पूरी क्षमता विकसित करना है।इसी बदलाव को देखते हुए संजय मेहरोत्रा का “विजन सेआगे एक्जीक्यूशन” वाला बयान भारत के सेमीकंडक्टर सफर के मौजूदा चरण को समझने के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है। देश के सामने अब चुनौती इन शुरुआती उपलब्धियों को बड़े पैमाने की, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में बदलने की है।
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