September 15, 2026 3:05 pm

मोहन यादव: छात्र राजनीति से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री तक का सफर

मोहन यादव का राजनीतिक सफर, छात्र राजनीति से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री तक

मोहन यादव मध्य प्रदेश की राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव जीतने के बाद उनका राजनीतिक सफर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा। दिसंबर 2023 में भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी और उन्होंने मध्य प्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली।

मोहन यादव की राजनीतिक यात्रा को केवल मुख्यमंत्री बनने की कहानी के रूप में नहीं देखा जा सकता। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले मोहन यादव ने संगठनात्मक जिम्मेदारियों, विधानसभा चुनावों और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में काम करते हुए धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत की।

शुरुआती जीवन और शिक्षा

मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को उज्जैन, मध्य प्रदेश में हुआ। उनके पिता का नाम पूनमचंद यादव बताया जाता है। उनका पारिवारिक जीवन उज्जैन से जुड़ा रहा और राजनीति में आने से पहले उन्होंने शिक्षा तथा सामाजिक गतिविधियों में भी रुचि दिखाई।

उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी काफी व्यापक रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने बीएससी, एलएलबी, एमए, एमबीए और पीएचडी जैसी उच्च शिक्षा प्राप्त की है। शिक्षा के प्रति उनकी रुचि उनके सार्वजनिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

राजनीति के साथ-साथ मोहन यादव की रुचि सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में भी रही। छात्र जीवन में ही उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी थी।

छात्र राजनीति से राजनीतिक सफर की शुरुआत

मोहन यादव के राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े और उज्जैन में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे ABVP की उज्जैन इकाई में नगर मंत्री भी रहे। 1982 में वे छात्र संघ के सह-सचिव चुने गए। इसके बाद छात्र संगठन में उनकी सक्रियता बढ़ती गई। छात्र राजनीति ने उन्हें संगठन चलाने, युवाओं के बीच काम करने और सार्वजनिक मुद्दों को समझने का अवसर दिया। यही अनुभव आगे चलकर उनके राजनीतिक करियर की नींव बना। भाजपा संगठन से जुड़ते हुए उन्होंने प्रदेश स्तर पर भी कई जिम्मेदारियां निभाईं।

संगठन में बढ़ती जिम्मेदारियां

मोहन यादव ने भाजपा के साथ लंबे समय तक संगठनात्मक स्तर पर काम किया। वे भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्य रहे। इसके अलावा सिंहस्थ से संबंधित समितियों और मध्य प्रदेश के विकास से जुड़ी संस्थाओं में भी उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। उनकी राजनीतिक सक्रियता केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रही। संगठन और स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक काम करने के कारण उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत होती गई।

पहली बार विधायक बनने का सफर

मोहन यादव ने 2013 में उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। पहली ही जीत के बाद उन्होंने विधानसभा में अपनी जगह बनाई और क्षेत्रीय राजनीति में उनका कद बढ़ने लगा। इसके बाद 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने उज्जैन दक्षिण से जीत दर्ज की। लगातार दूसरी बार विधायक बनने के बाद भाजपा संगठन और राज्य की राजनीति में उनका महत्व बढ़ता गया। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी सीट से तीसरी बार जीत दर्ज की। इस चुनाव में भाजपा ने मध्य प्रदेश में शानदार प्रदर्शन करते हुए 163 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई।

शिवराज सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी

मोहन यादव को राज्य सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं। 2 जुलाई 2020 को उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई। मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल ने उन्हें राज्य के प्रशासनिक कामकाज और नीतिगत फैसलों का प्रत्यक्ष अनुभव दिया। एक विधायक से मंत्री तक पहुंचने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका और व्यापक हुई। यही अनुभव आगे मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने में भी उनके लिए महत्वपूर्ण रहा।

2023 में मुख्यमंत्री पद तक पहुंच

2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चा शुरू हुई। भाजपा विधायक दल की बैठक में मोहन यादव के नाम पर सहमति बनी। खास बात यह रही कि वे उस समय उज्जैन दक्षिण से तीसरी बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्हें मध्य प्रदेश का 19वां मुख्यमंत्री बनाया गया। उनके साथ जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला ने उपमुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इस तरह छात्र राजनीति से शुरू हुआ उनका सफर राज्य के सर्वोच्च राजनीतिक पद तक पहुंचा।

मुख्यमंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के सामने मध्य प्रदेश जैसे बड़े और विविध राज्य के प्रशासन की जिम्मेदारी आई। राज्य में कृषि, शिक्षा, रोजगार, उद्योग, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और धार्मिक पर्यटन जैसे कई क्षेत्र सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उज्जैन से आने के कारण धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े विषय भी उनके सार्वजनिक जीवन में विशेष महत्व रखते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका पूरे मध्य प्रदेश के विकास और प्रशासन से जुड़ी हुई है।

राजनीतिक सफर एक नजर में

  • 25 मार्च 1965: उज्जैन में जन्म
  • 1982: छात्र संघ के सह-सचिव चुने गए
  • छात्र जीवन: ABVP से जुड़े और संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं
  • 2013: पहली बार उज्जैन दक्षिण से विधायक बने
  • 2018: दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीता
  • 2 जुलाई 2020: शिवराज सिंह चौहान सरकार में कैबिनेट मंत्री बने
  • 2023: तीसरी बार उज्जैन दक्षिण से विधायक निर्वाचित
  • दिसंबर 2023: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने

मोहन यादव का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू होकर मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने की कहानी है। उज्जैन में संगठनात्मक गतिविधियों से शुरुआत करने के बाद उन्होंने विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज की और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। 2023 में भाजपा की बड़ी चुनावी जीत के बाद मुख्यमंत्री के रूप में उनका चयन मध्य प्रदेश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने राज्य के विकास, प्रशासन और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

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