July 22, 2026 6:39 am

प्रदेश सरकार अगले पांच वर्षों में केजी से पीजी तक निःशुल्क शिक्षा के लिए 5,467 करोड़ रुपये खर्च करेगी

Odisha to spend ₹5,467 crore for free education from KG to PG over next five years

नई दिल्ली, 27 अप्रैल: गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक सुलभ, समान और सस्ता बनाने के उद्देश्य से, राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत, अगले पांच वर्षों में केजी (किंडरगार्टन) से लेकर पीजी (परास्नातक) स्तर तक की शिक्षा नि:शुल्क प्रदान करने के लिए करीब 5,467 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

सरकार ने बताया है कि इस योजना से सरकारी और सरकारी-अनुदान प्राप्त संस्थानों में नियमित पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले पात्र छात्रों को प्रवेश शुल्क पूरी तरह से माफ किया जाएगा। यह कदम उन छात्रों की आर्थिक बाधाओं को दूर करने के लिए उठाया गया है जो शिक्षा ग्रहण करने में असमर्थ हैं।

शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य शिक्षा को हर बच्चे के लिए सुलभ बनाना है। इससे न केवल विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि उनकी योग्यता और कौशल भी बेहतर होगा। इस योजना से गरीब परिवारों में शिक्षा का स्तर सुधारने में मदद मिलेगी।’

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा में निवेश सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है और इसका सकारात्मक प्रभाव दीर्घकालिक आर्थिक विकास पर पड़ेगा। निःशुल्क शिक्षा के माध्यम से छात्रों को बिना आर्थिक तनाव के उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, जो समाज और राष्ट्र दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

यह योजना न केवल प्रवेश शुल्क माफी तक सीमित है, बल्कि इसका उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण सीखने के अवसर प्रदान करना भी है। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि नेटवर्किंग, पुस्तकालय सुविधाएं, और अन्य शैक्षणिक संसाधनों को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया जाएगा।

इस योजना के क्रियान्वयन से उम्मीद की जा रही है कि दाखिला प्रतिशत में वृद्धि होगी, साथ ही dropout दर भी कम होगी। विद्यार्थी अब बिना आर्थिक चिंता के अपनी पढ़ाई पूरी कर पाएंगे। राज्य सरकार ने इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया है।

सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक दस्तावेजों और समाचार विज्ञप्ति में यह भी उल्लेख किया गया है कि योजना की निगरानी के लिए एक विशेष समन्वय समिति गठित की जाएगी, जो समय-समय पर योजना की प्रगति की समीक्षा करेगी और आवश्यक सुधारों को लागू करेगी।

इस महत्त्वपूर्ण योजना के तहत शिक्षण संस्थानों में दाखिला लेकर छात्र न केवल उच्च शिक्षा, बल्कि कौशल विकास की भी दिशा में कदम बढ़ाएंगे, जिससे उनकी भविष्य की संभावनाएं बेहतर होंगी।

सामाजिक न्याय और आर्थिक समावेशन को ध्यान में रखते हुए उठाया गया यह कदम शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों द्वारा स्वागत योग्य माना जा रहा है। इससे राज्य में शिक्षा का स्तर और पहुंच दोनों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

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