July 22, 2026 4:38 am

ग्रेजुएट्स का न्याय प्रवेश परीक्षा के अंकों से नहीं होना चाहिए

Judging graduates, not entrance scores

नई दिल्ली। हाल ही में शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण बदलाव की चर्चा तेज हो गई है, जिसमें मानक रिज्यूमे से प्रवेश परीक्षा रैंक्स को हटाने पर जोर दिया जा रहा है। यह कदम विभिन्न विशेषज्ञों और शिक्षा संस्थानों द्वारा एक पूर्वाग्रहपूर्ण तथा कई बार अप्रासंगिक तथ्यों को हटाने की दिशा में उठाया गया है, जिससे उम्मीदवारों का मूल्यांकन और भी निष्पक्ष और व्यापक हो सके।

प्रवेश परीक्षा रैंक या स्कोर अक्सर उम्मीदवारों के चयन प्रक्रिया में सबसे अहम मापदंड होते हैं, लेकिन यह हमेशा उनकी पूर्ण प्रतिभा, कौशल या कार्य क्षमता को प्रतिबिंबित नहीं करते। इससे कई बार केवल अंकों के आधार पर चयन की प्रक्रिया हो जाती है, जिससे प्रतिभाशाली छात्रों को मौका नहीं मिलता या गलत मूल्यांकन हो जाता है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, कई कंपनियां और शैक्षणिक संस्थान अब मानक रिज्यूमे से इस डेटा को हटाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवेश रैंक हटाने से उम्मीदवारों के अनुभव, परियोजनाओं, भाषाई कौशल, स्वयंसेवी कार्य, और अन्य गुणों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकेगा। इससे समग्र रूप से भर्ती प्रक्रिया में विविधता और गुणवत्ता बढ़ेगी। शैक्षणिक जगत में यह बदलाव न केवल छात्रों के लिए अधिक अवसर लेकर आएगा, बल्कि संगठनों को भी प्रतिभा की सही पहचान करने में मदद करेगा।

कुछ कंपनियों ने तो प्रवेश स्कोर को रिज्यूमे से हटाकर इंटरव्यू और व्यावहारिक टेस्ट को महत्त्व देना शुरू कर दिया है। इससे न केवल चयन प्रक्रिया अधिक समृद्ध होगी, बल्कि यह नियम पूर्वाग्रहों से भी बचाएगा। इसी तरह, विश्वविद्यालय भी अब अपने अप्रवेश प्रक्रियाओं में रैंक या प्रवेश स्कोर की जगह उम्मीदवारों के कौशल और व्यक्तित्व के आधार पर आंकलन करने पर जोर दे रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. कविता शुक्ला कहती हैं, “आज के समय में केवल प्रवेश रैंक से किसी छात्र के भविष्य का निर्धारण करना सही नहीं है। हर छात्र की प्रतिभा और क्षमता अलग होती है, जिसे केवल अंक नहीं परखा जा सकता। इसलिए, रिज्यूमे से इस स्कोर को हटाना एक क्रांतिकारी कदम है।”

हालांकि इस बदलाव के कुछ आलोचक भी हैं, जो कहते हैं कि प्रवेश रैंक पूरी तरह से अप्रासंगिक नहीं हो सकता क्योंकि यह एक निश्चित स्तर का योग्यता पैमाना है। लेकिन अधिकतर विशेषज्ञ मानते हैं कि इसे मुख्य प्राथमिकता बनाए बिना अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को भी ध्यान में लाना ज़रूरी है।

संक्षेप में, प्रवेश रैंक को मानक रिज्यूमे से हटाने का निर्णय भर्ती प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, समावेशी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इससे न केवल छात्रों को अपनी वास्तविक महत्वाकांक्षाओं और क्षमताओं को प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे परिणाम भी देखने को मिलेंगे।

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