July 22, 2026 6:39 am

महाराष्ट्र के मंत्री ने निजी तौर पर स्वीकारा कि उन्हें पता नहीं था कि TET परीक्षा के प्रश्न पत्र आगरा में छापे गए, कहा BJP विधायक

Maharashtra minister privately admitted he didn't know TET exam papers printed in Agra, says BJP MLA

महाराष्ट्र में हाल ही में राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री द्वारा एक महत्वपूर्ण खुलासा किया गया है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में गंभीर कमियों का पर्दाफाश हुआ है। पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंतीवार ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह स्थिति पूरी तरह से चिंताजनक है और राज्य स्तरीय परीक्षाओं की समीक्षा करना आवश्यक है।

मुनगंतीवार ने कहा कि वर्तमान शिक्षा मंत्री ने निजी तौर पर स्वीकार किया है कि उन्हें टीईटी (टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट) परीक्षा के प्रश्न पत्र आगरा में छपने की जानकारी नहीं थी। इस खुलासे से शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। उन्होंने बताया कि ऐसी महत्वपूर्ण परीक्षा के पेपर छपने की प्रक्रिया पर नजर रखने में भारी लापरवाही बरती गई है।

पूर्व मंत्री का मानना है कि इस तरह की अनियमितताएँ न केवल विभाग की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं, बल्कि विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के साथ अन्याय भी हैं। उन्होंने कहा, “परीक्षाओं की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, और अगर इस स्तर पर भी सुरक्षात्मक कदम ढीले हैं, तो हमें इसके कारणों को समझ कर सुधार करना होगा।”

मुनगंतीवार ने जोर देते हुए कहा कि राज्य में जारी किसी भी परीक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए संपूर्ण और व्यवस्थित समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि बाहरी एजेंसियों की सहायता से परीक्षा संचालन में सुधार किए जाएं ताकि भविष्य में इस प्रकार की चूक न हो।

साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि बीजपी के विधायक और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर कठोरता से पूछताछ करें और शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाएं। उन्होंने जनता का विश्वास बहाल करने के लिए शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली में बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।

विशेषज्ञों ने भी इस घटना को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि टीईटी जैसे परीक्षाओं का सही तरीके से आयोजन होना आवश्यक है क्योंकि इससे लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य का निर्धारण होता है। उन्होंने कहा कि पेपरिंग और प्रिंटिंग प्रक्रिया में सुरक्षा के कड़े प्रबंध लागू किए जाने चाहिए।

इस विवाद में शिक्षा विभाग की जवाबदेही और समेकित समीक्षा की मांग तेजी से बढ़ रही है। महाराष्ट्र सरकार से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें ताकि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो।

महाराष्ट्र के शिक्षा क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, जब लापरवाही और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। केवल तभी राज्य में शिक्षा प्रणाली मजबूत और विश्वसनीय बन सकेगी।

Source