राजनाथ सिंह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। उनका राजनीतिक सफर छात्र संगठन और सामाजिक गतिविधियों से शुरू होकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री और भारत के रक्षा मंत्री तक पहुँचा है। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने शिक्षा, कृषि, आंतरिक सुरक्षा और रक्षा आधुनिकीकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। उनका राजनीतिक जीवन संगठनात्मक अनुभव और केंद्र तथा राज्य सरकारों में विभिन्न भूमिकाओं का परिचय देता है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
राजनाथ सिंह का जन्म 10 जुलाई 1951 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के भभौरा गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम राम बदन सिंह और माता का नाम गुजराती देवी था। उनका परिवार कृषि से जुड़ा था। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े राजनाथ सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव में प्राप्त की।उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्रथम श्रेणी में हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मिर्जापुर के के.बी. पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में भौतिक विज्ञान के व्याख्याता के रूप में काम किया। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उनका जीवन अध्यापन और शिक्षा से जुड़ा रहा।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत
राजनाथ सिंह का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव वर्ष 1964 में हुआ। उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लिया और वर्ष 1974 में भारतीय जनसंघ की मिर्जापुर इकाई के सचिव बने। अगले वर्ष उन्हें जनसंघ का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया।वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और लगभग दो वर्षों तक हिरासत में रहना पड़ा। रिहाई के बाद उन्होंने जनता पार्टी के माध्यम से चुनावी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1977 में विधानसभा चुनाव जीतकर उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
भाजपा में उभार और शिक्षा मंत्री की भूमिका
वर्ष 1980 में राजनाथ सिंह भारतीय जनता पार्टी से जुड़े। उन्होंने संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य किया। वर्ष 1984 में वे भाजपा की युवा इकाई के प्रदेश अध्यक्ष बने, 1986 में राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त हुए और 1988 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।वर्ष 1991 में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार में उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए कठोर कानून का समर्थन किया गया। शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में शामिल करने जैसे विषय भी उस समय चर्चा में रहे।
मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के रूप में योगदान
वर्ष 1999 में राजनाथ सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 2000 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला और 2002 तक इस जिम्मेदारी पर रहे। उनके कार्यकाल में कानून-व्यवस्था और सरकारी नौकरियों में अवसरों से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रहे।मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद वर्ष 2003 में वे केंद्र सरकार में कृषि मंत्री बने। इस दौरान किसान कॉल सेंटर, कृषि आय बीमा योजना और कृषि ऋण से संबंधित उपायों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया गया। कृषि क्षेत्र से जुड़े इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों तक जानकारी और सहायता पहुँचाना था।
भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री
राजनाथ सिंह दिसंबर 2005 में पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 2009 तक इस पद पर रहे। वर्ष 2009 में उन्होंने गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव जीता। जनवरी 2013 में वे दूसरी बार पार्टी अध्यक्ष बने। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के अभियान और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।वर्ष 2014 से 2019 तक उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में कार्य किया। इस दौरान आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा संबंधी चुनौतियाँ प्रमुख विषय रहे। वर्ष 2017 में उन्होंने अभिनेता अक्षय कुमार के साथ ‘भारत के वीर’ पोर्टल और मोबाइल एप की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य शहीद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता जुटाना था।
रक्षा मंत्री के रूप में कार्यकाल
31 मई 2019 को राजनाथ सिंह ने भारत के रक्षा मंत्री का पद संभाला। इस भूमिका में उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाना, रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहित करना और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना शामिल रहा है।राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का समझौता वर्ष 2016 में हुआ था। राजनाथ सिंह के रक्षा मंत्री रहते हुए विमानों की आपूर्ति आगे बढ़ी और जुलाई 2020 में पाँच विमानों का पहला बेड़ा अंबाला वायुसेना स्टेशन पहुँचा।वर्ष 2020 में भारत-चीन सीमा पर तनाव के दौरान उन्होंने सैन्य अधिकारियों के साथ चर्चा की और पूर्वी लद्दाख का दौरा किया। गलवान घाटी की घटना में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत हुई।
अग्निपथ योजना और ऑपरेशन सिंदूर
रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की। इसके अंतर्गत चयनित युवाओं को अग्निवीर कहा जाता है। सरकार ने इस योजना का उद्देश्य सैन्य भर्ती व्यवस्था में बदलाव और सेना की औसत आयु कम करना बताया। योजना को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध भी हुआ। राजनाथ सिंह ने इसे रक्षा क्षेत्र में बदलाव की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया।मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर भारत की सुरक्षा नीति से जुड़ा प्रमुख घटनाक्रम रहा। राजनाथ सिंह ने इसे आतंकवादी ढाँचे के विरुद्ध भारत की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया। उनके कार्यकाल में स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आधुनिक सैन्य तकनीक और ड्रोन जैसी क्षमताओं के विकास पर भी जोर दिया गया।
राजनाथ सिंह का राजनीतिक सफर शिक्षा के क्षेत्र से शुरू होकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक पहुँचा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय गृह मंत्री और रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में काम किया।उनका सार्वजनिक जीवन भारतीय राजनीति में संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की विविधता को दर्शाता है। रक्षा मंत्री के रूप में उनकी भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा, सशस्त्र बलों की क्षमता और स्वदेशी रक्षा उत्पादन से जुड़े विषयों के केंद्र में रही है।
POLITICAL DESK | DAILY INSIGHTS









