October 30, 2026 2:48 pm

संजय मल्होत्रा का जीवन परिचय और RBI गवर्नर बनने तक का सफर

संजय मल्होत्रा भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर

भारत की अर्थव्यवस्था में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। देश में मौद्रिक नीति, बैंकिंग व्यवस्था और वित्तीय स्थिरता से जुड़े फैसलों में RBI का केंद्रीय स्थान है। इस महत्वपूर्ण संस्था का नेतृत्व करने वाले संजय मल्होत्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अनुभवी अधिकारी हैं, जिन्होंने राजस्थान सरकार से लेकर केंद्र सरकार के वित्तीय मंत्रालयों तक कई अहम जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। दिसंबर 2024 में उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के 26वें गवर्नर के रूप में पदभार संभाला। उनका करियर प्रशासन, ऊर्जा, कर व्यवस्था और वित्तीय सेवाओं जैसे विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है। उनकी तकनीकी शिक्षा और सार्वजनिक नीति की समझ ने उनके प्रशासनिक सफर को एक विशिष्ट पहचान दी है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

संजय मल्होत्रा का जन्म 14 फरवरी 1968 को राजस्थान के बीकानेर में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बीकानेर के केंद्रीय विद्यालय से प्राप्त की। पढ़ाई के प्रति उनकी रुचि ने उन्हें उच्च शिक्षा के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुँचाया। उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), कानपुर से कंप्यूटर साइंस में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से सार्वजनिक नीति में मास्टर डिग्री प्राप्त की। तकनीकी ज्ञान और सार्वजनिक नीति की शिक्षा का यह संयोजन उनके प्रशासनिक कार्यों में उपयोगी रहा। उनके पिता सीमा सुरक्षा बल (BSF) में अधिकारी थे। एक अनुशासित पारिवारिक वातावरण में पले-बढ़े संजय मल्होत्रा ने आगे चलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपना करियर बनाया।

भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश

संजय मल्होत्रा राजस्थान कैडर के 1990 बैच के IAS अधिकारी हैं। अपने लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में काम किया। उनके अनुभव का दायरा खनन, वित्त, ऊर्जा, वाणिज्यिक कराधान और सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन तक फैला रहा। वर्ष 2000 से 2003 के बीच उन्होंने केंद्र सरकार में अंतरिक्ष और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से जुड़े मंत्रियों के निजी सचिव के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में जिम्मेदारियाँ निभाईं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (UNIDO) में परियोजना समन्वयक के रूप में भी काम किया। इन अनुभवों ने उन्हें प्रशासनिक प्रक्रियाओं, आर्थिक गतिविधियों और विकास परियोजनाओं को करीब से समझने का अवसर दिया।

ऊर्जा और वित्तीय सेवाओं में भूमिका

वर्ष 2020 में संजय मल्होत्रा को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया। इसी अवधि में उन्होंने ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (REC) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में भी कार्य किया। यह भूमिका ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़ी वित्तीय व्यवस्थाओं के संचालन से संबंधित थी। फरवरी 2022 में उन्हें वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग का सचिव बनाया गया। इस पद पर रहते हुए वे भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से जुड़ी प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण प्रशासनिक भूमिका में रहे। वे भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड के सदस्य भी रहे। इन जिम्मेदारियों ने उन्हें बैंकिंग, बीमा और वित्तीय संस्थानों के कामकाज को समझने का प्रत्यक्ष अनुभव दिया, जो आगे चलकर RBI के गवर्नर के रूप में उनके कार्यकाल के लिए प्रासंगिक रहा।

राजस्व सचिव से RBI गवर्नर तक

दिसंबर 2022 में संजय मल्होत्रा को भारत का राजस्व सचिव नियुक्त किया गया। इस पद पर उनका कार्य कर व्यवस्था और राजस्व प्रशासन से संबंधित नीतियों के क्रियान्वयन से जुड़ा रहा। उनके कार्यकाल के दौरान नई आयकर व्यवस्था को लागू करने से संबंधित काम भी हुआ।11 दिसंबर 2024 को उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक के 26वें गवर्नर के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने शक्तिकांत दास का स्थान लिया। RBI गवर्नर के रूप में उनकी जिम्मेदारियों में मौद्रिक नीति के संचालन, बैंकिंग प्रणाली की निगरानी और वित्तीय स्थिरता से जुड़े विषय शामिल हैं।यह पद ऐसे समय में महत्वपूर्ण होता है, जब महँगाई, आर्थिक विकास, ऋण की उपलब्धता और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ देश की वित्तीय व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं।

संजय मल्होत्रा का करियर तकनीकी शिक्षा, सार्वजनिक नीति और व्यापक प्रशासनिक अनुभव का संयोजन है। राजस्थान के विभिन्न विभागों में कार्य करने से लेकर केंद्र सरकार में वित्तीय सेवाओं और राजस्व प्रशासन की जिम्मेदारियाँ निभाने तक, उन्होंने कई क्षेत्रों में काम किया है।भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में उनकी भूमिका देश की मौद्रिक नीति और वित्तीय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उनके कार्यकाल में लिए जाने वाले निर्णय बैंकिंग क्षेत्र, व्यवसायों और आम नागरिकों की आर्थिक परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं।
Knowledge desk | daily Insights

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