October 29, 2026 12:44 pm

भारत में इंटरनेट की शुरुआत कब हुई? 1995 से 5G तक का सफर

भारत में इंटरनेट की शुरुआत 1995 से 5G तक का सफर

आज इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन पढ़ाई, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन शॉपिंग जैसे काम इंटरनेट की मदद से आसानी से किए जा सकते हैं। कुछ ही सेकंड में हम दुनिया के किसी भी हिस्से की जानकारी हासिल कर सकते हैं। लेकिन भारत में इंटरनेट की शुरुआत इतनी आसान नहीं थी। शुरुआती दौर में इसकी पहुंच सीमित थी, कनेक्शन धीमे थे और इंटरनेट इस्तेमाल करना काफी महंगा था।

भारत में इंटरनेट की शुरुआत 1986 में ERNET से हुई, जबकि आम जनता के लिए सार्वजनिक इंटरनेट सेवा 15 अगस्त 1995 को शुरू की गई। इसके बाद तकनीक में हुए बदलावों ने भारत की डिजिटल दुनिया को पूरी तरह बदल दिया। आइए जानते हैं कि भारत में इंटरनेट का सफर कैसे शुरू हुआ और यह आम लोगों तक कैसे पहुँचा।

भारत में इंटरनेट की शुरुआत कैसे हुई?

भारत में इंटरनेट के विकास की शुरुआती कड़ी 1986 में शुरू हुई, जब एजुकेशन एंड रिसर्च नेटवर्क (ERNET) परियोजना की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों को नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना था।शुरुआत में इंटरनेट का इस्तेमाल मुख्य रूप से तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित था। आम लोगों के लिए इंटरनेट उपलब्ध नहीं था। उस समय कंप्यूटर और नेटवर्किंग तकनीक भी आज की तरह आसानी से उपलब्ध नहीं थी।ERNET ने भारत में नेटवर्किंग और इंटरनेट तकनीक के विकास के लिए आधार तैयार किया। इसी तरह के शुरुआती प्रयासों ने आगे चलकर सार्वजनिक इंटरनेट सेवाओं के विस्तार का रास्ता खोला।

15 अगस्त 1995: आम लोगों के लिए इंटरनेट की शुरुआत

भारत के इंटरनेट इतिहास में 15 अगस्त 1995 एक महत्वपूर्ण तारीख है। इसी दिन सरकारी दूरसंचार कंपनी विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) ने Gateway Internet Access Service (GIAS) शुरू की। इसके साथ आम जनता के लिए सार्वजनिक इंटरनेट सेवा का रास्ता खुला।शुरुआत में इंटरनेट सेवा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में उपलब्ध कराई गई। बाद में इसका विस्तार दूसरे शहरों तक भी हुआ।उस समय इंटरनेट चलाने के लिए कंप्यूटर, टेलीफोन लाइन और डायल-अप मॉडेम की जरूरत होती थी। उपयोगकर्ता फोन लाइन के जरिए इंटरनेट से जुड़ते थे। कनेक्शन स्थापित होते समय मॉडेम से बीप जैसी आवाज आती थी, जो शुरुआती इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के लिए एक खास अनुभव था।हालाँकि, इंटरनेट सेवा शुरू होने के बावजूद इसकी पहुंच तुरंत हर घर तक नहीं पहुँची। कंप्यूटर की कीमत, कनेक्शन का खर्च और तकनीकी जानकारी की कमी इसके विस्तार में बड़ी बाधाएँ थीं।

शुरुआती इंटरनेट इतना धीमा और महंगा क्यों था?

आज हम मोबाइल पर वीडियो देखते हैं, बड़ी फाइलें डाउनलोड करते हैं और वीडियो कॉल करते हैं। लेकिन 1990 के दशक में इंटरनेट इस्तेमाल करना काफी अलग अनुभव था।शुरुआती डायल-अप कनेक्शन की गति बहुत कम थी। सामान्य वेबसाइट खोलने और फाइल डाउनलोड करने में भी काफी समय लग सकता था। इसके अलावा, इंटरनेट कनेक्शन के लिए टेलीफोन लाइन का इस्तेमाल होने के कारण फोन और इंटरनेट को एक साथ इस्तेमाल करने में परेशानी होती थी।इंटरनेट की कीमत भी आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती थी। शुरुआती योजनाओं में कनेक्शन और इस्तेमाल के लिए अधिक शुल्क देना पड़ता था। कई बार कनेक्शन टूट जाता था या फोन लाइन व्यस्त होने के कारण इंटरनेट से जुड़ना मुश्किल हो जाता था।इन्हीं कारणों से शुरुआती वर्षों में इंटरनेट का इस्तेमाल मुख्य रूप से व्यवसायों, तकनीकी विशेषज्ञों और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों तक सीमित रहा।

ब्रॉडबैंड ने इंटरनेट को बनाया आसान

1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक में इंटरनेट सेवाओं का विस्तार होने लगा। निजी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP) के आने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी और लोगों को कनेक्टिविटी के नए विकल्प मिलने लगे।1998 में सत्यम इन्फोवे जैसे निजी सेवा प्रदाताओं के आने से इंटरनेट बाजार में बदलाव शुरू हुआ। इसके बाद DSL और केबल ब्रॉडबैंड जैसी तकनीकों ने इंटरनेट इस्तेमाल करने के तरीके को बदल दिया।2004 में भारत की ब्रॉडबैंड नीति ने तेज और हमेशा उपलब्ध रहने वाले इंटरनेट कनेक्शन के विकास को बढ़ावा दिया। डायल-अप की तुलना में ब्रॉडबैंड ने बेहतर गति और अधिक सुविधाजनक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई।धीरे-धीरे इंटरनेट का इस्तेमाल ईमेल भेजने, ऑनलाइन जानकारी खोजने, व्यवसाय चलाने, पढ़ाई करने और डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाने के लिए बढ़ने लगा। फिर भी, उस समय अच्छी इंटरनेट सुविधा हर क्षेत्र में उपलब्ध नहीं थी।

मोबाइल इंटरनेट और 3G-4G का दौर

मोबाइल फोन और वायरलेस नेटवर्क के विकास ने इंटरनेट को कंप्यूटर से निकालकर लोगों की जेब तक पहुँचा दिया। अब इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए हर समय डेस्कटॉप या लैपटॉप के सामने बैठना जरूरी नहीं रह गया था।3G तकनीक ने मोबाइल पर इंटरनेट ब्राउजिंग और ऑनलाइन सेवाओं को अधिक सुविधाजनक बनाया। इसके बाद 4G तकनीक ने तेज डेटा कनेक्टिविटी, वीडियो स्ट्रीमिंग और मोबाइल ऐप के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया।स्मार्टफोन की बढ़ती उपलब्धता ने भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई। लोग अब मोबाइल के जरिए समाचार पढ़ने, ऑनलाइन टिकट बुक करने, डिजिटल भुगतान करने और सोशल मीडिया इस्तेमाल करने लगे।इस तरह मोबाइल इंटरनेट भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया।

2016 में जियो की एंट्री ने कैसे बदला इंटरनेट?

5 सितंबर 2016 को रिलायंस जियो की व्यावसायिक 4G सेवा शुरू हुई। शुरुआती दौर में कंपनी ने मुफ्त वॉइस कॉल और प्रचार अवधि के दौरान मुफ्त डेटा जैसी पेशकश की।इस कदम ने भारतीय दूरसंचार बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाई। अन्य कंपनियों पर भी डेटा प्लान और कॉलिंग सेवाओं को अधिक किफायती बनाने का दबाव पड़ा।सस्ते मोबाइल डेटा और स्मार्टफोन की बढ़ती उपलब्धता के कारण इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा। ऑनलाइन वीडियो, सोशल मीडिया, डिजिटल पेमेंट और मोबाइल आधारित सेवाएँ अधिक लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनने लगीं।इंटरनेट का यह विस्तार केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। छोटे शहरों और कस्बों में भी लोगों को ऑनलाइन जानकारी, शिक्षा और मनोरंजन तक पहुँचने के नए अवसर मिले।

5G और भारत का डिजिटल भविष्य

आज भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, ई-कॉमर्स, मनोरंजन और सरकारी सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में किया जा रहा है। डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं ने रोजमर्रा के कई काम आसान बनाए हैं।5G तकनीक तेज कनेक्टिविटी और कम विलंबता की संभावनाएँ बढ़ाती है। इसका उपयोग स्मार्ट डिवाइस, औद्योगिक ऑटोमेशन, आधुनिक संचार प्रणालियों और अन्य डिजिटल सेवाओं में किया जा सकता है।डिजिटल इंडिया, भारतनेट और कॉमन सर्विस सेंटर जैसी पहल का उद्देश्य डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी का विस्तार शिक्षा, सूचना और सरकारी सेवाओं तक पहुँच बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।हालाँकि, डिजिटल विकास के साथ कुछ चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विश्वसनीय इंटरनेट, डिजिटल साक्षरता, ऑनलाइन धोखाधड़ी से सुरक्षा और व्यक्तिगत डेटा की गोपनीयता जैसे विषयों पर ध्यान देना जरूरी है।

भारत में इंटरनेट का सफर: एक नजर में

  • 1986: ERNET के जरिए शैक्षणिक और अनुसंधान नेटवर्क की शुरुआत।
  • 15 अगस्त 1995: VSNL ने सार्वजनिक इंटरनेट सेवा लॉन्च की।
  • 1998: निजी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं का विस्तार शुरू हुआ।
  • 2004: ब्रॉडबैंड नीति ने तेज इंटरनेट के विकास को बढ़ावा दिया।
  • 2010: 3G स्पेक्ट्रम नीलामी से मोबाइल इंटरनेट के विस्तार को गति मिली।
  • 5 सितंबर 2016: रिलायंस जियो की व्यावसायिक 4G सेवा शुरू हुई।
  • 5G का दौर: तेज कनेक्टिविटी और नई डिजिटल सेवाओं की संभावनाएँ बढ़ीं।

भारत में इंटरनेट की यात्रा सीमित शैक्षणिक नेटवर्क से शुरू होकर सार्वजनिक कनेक्टिविटी, ब्रॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट तक पहुँची है। हर नए तकनीकी चरण ने इंटरनेट को अधिक लोगों के लिए उपयोगी बनाया है।

 DAILY INSIGHTS

भारत में अखबारों का इतिहास: हिकी की बंगाल गजट से डिजिटल मीडिया तक

Leave a Comment