नोबेल पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मानों में से एक है। यह उन व्यक्तियों और संगठनों को सम्मानित करता है, जिनके काम ने विज्ञान, साहित्य, शांति और मानवता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया हो। इसकी शुरुआत स्वीडिश वैज्ञानिक और उद्योगपति अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के आधार पर हुई थी। अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा ऐसे पुरस्कारों के लिए समर्पित किया था, जो मानवता के लिए सबसे बड़ा लाभ पहुंचाने वाले कार्यों को सम्मानित करें।
क्या है नोबेल पुरस्कार?
अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार शुरुआत में पांच क्षेत्रों में पुरस्कार देने की व्यवस्था की गई थी—भौतिकी, रसायन विज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान या चिकित्सा, साहित्य और शांति। बाद में 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में अर्थशास्त्र का पुरस्कार स्थापित किया, जिसका पहला पुरस्कार 1969 में दिया गया। इस तरह आज कुल छह पुरस्कार श्रेणियां हैं।
पहले नोबेल पुरस्कार 1901 में प्रदान किए गए थे। हर वर्ष पुरस्कारों की घोषणा अक्टूबर में होती है, जबकि पुरस्कार समारोह 10 दिसंबर को आयोजित किए जाते हैं। अधिकांश पुरस्कार स्टॉकहोम में दिए जाते हैं, जबकि नोबेल शांति पुरस्कार का समारोह ओस्लो, नॉर्वे में होता है।
नोबेल पुरस्कार में क्या मिलता है?
नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले विजेता को सामान्यतः तीन प्रमुख चीजें मिलती हैं—
- नोबेल पदक
- प्रमाणपत्र
- पुरस्कार राशि
एक पुरस्कार को अधिकतम तीन व्यक्ति साझा कर सकते हैं।
2026 में मेडिसिन का नोबेल किसे मिला?
अब बात 2026 के Nobel Prize in Physiology or Medicine की। इसकी घोषणा 5 अक्टूबर 2026 को की गई। इस वर्ष यह प्रतिष्ठित सम्मान तीन वैज्ञानिकों—कार्ल डाइसेरोथ (Karl Deisseroth), पीटर हेगेमैन (Peter Hegemann) और जॉर्ज नागेल (Georg Nagel) को संयुक्त रूप से दिया गया। उन्हें “light-gated ion channels and optogenetics” से संबंधित खोजों के लिए सम्मानित किया गया। सरल शब्दों में, उनके काम ने वैज्ञानिकों को रोशनी की मदद से जीवित मस्तिष्क की खास तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधि को नियंत्रित और अध्ययन करने का रास्ता दिया।
क्या है ऑप्टोजेनेटिक्स?
ऑप्टोजेनेटिक्स ऐसी तकनीक है जिसमें प्रकाश की मदद से विशेष कोशिकाओं, खासकर न्यूरॉन्स, की गतिविधि को नियंत्रित किया जा सकता है। इस खोज की शुरुआत एक छोटे एककोशिकीय शैवाल Chlamydomonas से हुई। पीटर हेगेमैन इस बात को समझना चाहते थे कि यह शैवाल प्रकाश की दिशा में कैसे तैरता है। आगे के शोध में हेगेमैन और जॉर्ज नागेल ने channelrhodopsin नामक प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन की पहचान की। नीली रोशनी पड़ने पर यह प्रोटीन एक चैनल खोलता है, जिससे आयन कोशिका में प्रवेश करते हैं और विद्युत संकेत पैदा होता है।
इसके बाद कार्ल डाइसेरोथ ने इस खोज को न्यूरॉन्स पर लागू किया। उन्होंने channelrhodopsin से जुड़ा जीन तंत्रिका कोशिकाओं में पहुंचाया और दिखाया कि प्रकाश डालकर न्यूरॉन्स को सक्रिय किया जा सकता है। 2005 में उन्होंने इस दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम प्रकाशित किए और 2007 में जीवित चूहों के मस्तिष्क में भी इस तकनीक का प्रदर्शन किया गया। मस्तिष्क में अरबों तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं और वे अलग-अलग कार्यों से जुड़ी होती हैं। पहले वैज्ञानिकों के लिए यह पता लगाना मुश्किल था कि किसी विशेष न्यूरॉन या न्यूरल सर्किट का किसी व्यवहार, भावना या याददाश्त में वास्तव में क्या योगदान है।
ऑप्टोजेनेटिक्स ने इस शोध को काफी अधिक सटीक बना दिया। इसकी मदद से वैज्ञानिक यह अध्ययन कर सके कि याददाश्त, भावनाएं और व्यवहार किस तरह विशेष न्यूरल सर्किट से जुड़े हैं। इस तकनीक ने न्यूरोसाइंस में एक नए दौर की शुरुआत की है।इसका इस्तेमाल न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों पर शोध में भी किया जा रहा है। वैज्ञानिक यह भी अध्ययन कर रहे हैं कि ऑप्टोजेनेटिक्स आधारित तकनीकों की मदद से कुछ प्रकार की दृष्टि हानि को दूर करने में भविष्य में कितनी मदद मिल सकती है।
2026 के मेडिसिन नोबेल के तीन विजेता
कार्ल डाइसेरोथ — अमेरिका के वैज्ञानिक और Stanford University से जुड़े शोधकर्ता हैं। उन्होंने channelrhodopsin को न्यूरॉन्स में इस्तेमाल कर प्रकाश के जरिए तंत्रिका गतिविधि नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पीटर हेगेमैन — जर्मनी के वैज्ञानिक और Humboldt University of Berlin में प्रोफेसर हैं। उन्होंने प्रकाश-संवेदनशील प्रोटीन की खोज की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया।
जॉर्ज नागेल — जर्मनी के वैज्ञानिक और University of Würzburg से जुड़े शोधकर्ता हैं। उन्होंने हेगेमैन के साथ channelrhodopsin की कार्यप्रणाली को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2026 का मेडिसिन नोबेल केवल एक वैज्ञानिक खोज का सम्मान नहीं है, बल्कि मस्तिष्क को समझने के एक नए तरीके की मान्यता है। पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल की channelrhodopsin संबंधी खोज तथा कार्ल डाइसेरोथ द्वारा इसे न्यूरॉन्स को नियंत्रित करने के लिए विकसित करने से ऑप्टोजेनेटिक्स का रास्ता खुला।
SCIENCE & TECHNOLOGY DESK | DAILY INSIGHTS










