हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो भले ही ज्यादातर फिल्मों में मुख्य भूमिका में नजर न आए हों, लेकिन अपने अभिनय से हर किरदार को यादगार बना देते हैं। दीपक डोबरियाल ऐसे ही अभिनेताओं में शामिल हैं। उन्होंने लंबे समय तक सहायक और चरित्र भूमिकाओं में काम किया, लेकिन अपनी सहज एक्टिंग, कॉमिक टाइमिंग और गंभीर किरदारों में गहराई के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई।उनका सफर मकबूल से शुरू होकर ओमकारा, तनु वेड्स मनु, हिंदी मीडियम, अंग्रेजी मीडियम, भोला और सेक्टर 36 जैसे अलग-अलग रंगों वाले प्रोजेक्ट्स तक पहुंचा। खास बात यह रही कि उन्होंने खुद को किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रखा।
उत्तराखंड से दिल्ली तक का सफर
दीपक डोबरियाल का जन्म 1 सितंबर 1975 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के कबरा गांव में हुआ। जब वे करीब पांच साल के थे, तब उनका परिवार दिल्ली आकर बस गया। इसी वजह से उनका बचपन और शुरुआती पढ़ाई दिल्ली में हुई।उन्होंने दिल्ली के गवर्नमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बेगमपुर से पढ़ाई की। बचपन से ही अभिनय में उनकी दिलचस्पी थी और भाई के साथ रामलीला में हिस्सा लेने से लेकर थिएटर तक उनका जुड़ाव धीरे-धीरे मजबूत होता गया।
थिएटर ने बनाई अभिनय की मजबूत नींव
दीपक डोबरियाल ने 1994 में दिल्ली से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की। इसके बाद वे प्रसिद्ध थिएटर निर्देशक अरविंद गौर के अस्मिता थिएटर ग्रुप से जुड़े और लगभग छह वर्षों तक थिएटर किया।इस दौरान उन्होंने तुगलक, अंधा युग, कोर्ट मार्शल, द गुड डॉक्टर, हैमलेट और मैकबेथ जैसे नाटकों में काम किया।थिएटर ने उन्हें किरदार को समझने, संवादों को स्वाभाविक तरीके से बोलने और बॉडी लैंग्वेज के जरिए भावनाएं व्यक्त करने की ट्रेनिंग दी। यही अनुभव बाद में उनके फिल्मी करियर की सबसे बड़ी ताकत बना।
‘मकबूल’ से फिल्मों में कदम
दीपक डोबरियाल ने 2003 में विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘मकबूल’ से फिल्मों में कदम रखा। यह भूमिका छोटी थी, लेकिन उनके लिए फिल्म इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण शुरुआत थी।इसके बाद 2004 में ‘मां तुझे सलाम’ में उन्हें लीड भूमिका निभाने का मौका मिला। हालांकि फिल्म बड़ी पहचान नहीं बना सकी, लेकिन दीपक के लिए यह अनुभव महत्वपूर्ण रहा।उनका असली ब्रेक कुछ साल बाद आया, जब विशाल भारद्वाज ने उन्हें ओमकारा में ऐसा किरदार दिया जिसने उनके करियर की दिशा बदल दी।
‘ओमकारा’ ने बदली करियर की दिशा
2006 की ‘ओमकारा’ दीपक डोबरियाल के करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई।अजय देवगन, सैफ अली खान और विवेक ओबेरॉय जैसे कलाकारों के बीच दीपक ने रजनीश “राज्जू” तिवारी का किरदार निभाया।किरदार का स्क्रीन टाइम भले ही सीमित था, लेकिन दीपक की सहज एक्टिंग और संवाद अदायगी ने उसे बेहद प्रभावी बना दिया। दर्शकों और आलोचकों ने उनके प्रदर्शन को नोटिस किया।इस फिल्म के लिए उन्हें Filmfare Special Performance Award से सम्मानित किया गया। यह उनके करियर का पहला बड़ा सम्मान बना और इसके बाद उन्हें लगातार बेहतर भूमिकाएं मिलने लगीं।
‘पप्पी जी’ ने बनाया कॉमेडी का चहेता चेहरा
अगर ओमकारा ने दीपक की गंभीर अभिनय क्षमता को सामने रखा, तो ‘तनु वेड्स मनु’ ने उन्हें बड़े पैमाने पर दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाया।2011 में आई फिल्म में उन्होंने पप्पी कूटी यानी पप्पी जी का किरदार निभाया। उनकी कॉमिक टाइमिंग, संवाद बोलने का अंदाज और बॉडी लैंग्वेज ने इस किरदार को बेहद लोकप्रिय बना दिया।2015 में ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ में भी वे इसी दुनिया के किरदार के साथ लौटे और एक बार फिर दर्शकों को खूब हंसाया।उनकी कॉमेडी की खासियत सिर्फ पंचलाइन नहीं थी। उनके चलने, बैठने, बोलने और किसी बात पर प्रतिक्रिया देने का तरीका भी किरदार का हिस्सा बन जाता था।तनु वेड्स मनु के लिए उन्हें IIFA Award और Apsara Award में कॉमिक परफॉर्मेंस के लिए सम्मान मिला।
‘हिंदी मीडियम’ में इरफान खान के साथ यादगार केमिस्ट्री
2017 की ‘हिंदी मीडियम’ में दीपक डोबरियाल और इरफान खान की जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आई।दीपक ने श्याम प्रकाश कोरी का किरदार निभाया। उनके किरदार में हास्य के साथ सामाजिक वास्तविकता की झलक भी थी।इरफान खान के साथ उनके दृश्यों में दोनों कलाकारों की सहजता और टाइमिंग साफ नजर आई। दीपक ने कॉमेडी के साथ किरदार की भावनात्मक परत को भी बनाए रखा।इस फिल्म के लिए उन्हें Filmfare Best Supporting Actor के लिए नामांकन भी मिला।
‘अंग्रेजी मीडियम’ में फिर दिखी शानदार जोड़ी
2020 में आई ‘अंग्रेजी मीडियम’ में दीपक ने गोपी बंसल का किरदार निभाया।एक बार फिर उनके सामने इरफान खान थे और दोनों की केमिस्ट्री फिल्म की खास बातों में शामिल रही।यहां भी दीपक ने कॉमेडी और इमोशन के बीच संतुलन बनाए रखा और दिखाया कि वे सिर्फ कॉमिक किरदार निभाने वाले अभिनेता नहीं हैं।
कॉमेडी से आगे बढ़कर गंभीर और ग्रे किरदार
दीपक डोबरियाल ने कभी खुद को सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं रखा। ‘शौर्य’ और ‘गुलाल’ जैसी फिल्मों में उनके गंभीर अभिनय ने उनकी रेंज दिखाई।इसके बाद बागी 2, लाल कप्तान और भेड़िया जैसे प्रोजेक्ट्स में भी उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।2023 की ‘भोला’ में उन्होंने एक खतरनाक और नेगेटिव किरदार निभाया। यह भूमिका उनके पहले के कॉमिक किरदारों से बिल्कुल अलग थी और इससे उनकी versatility एक बार फिर सामने आई।
‘सेक्टर 36’ में केंद्र में आया किरदार
‘सेक्टर 36’ (2024) दीपक डोबरियाल के करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।इस क्राइम थ्रिलर में उन्होंने इंस्पेक्टर राम चरण पांडे की भूमिका निभाई। इस बार उन्हें कहानी के केंद्र में रहकर एक गंभीर पुलिस अधिकारी का किरदार निभाने का अवसर मिला।फिल्म में उनके अभिनय की काफी चर्चा हुई। किरदार को निभाते हुए उन्होंने पुलिस अधिकारी की गंभीरता के साथ-साथ उसके भीतर चलने वाले तनाव और भावनात्मक दबाव को भी सामने रखा।यह भूमिका इस बात का उदाहरण बनी कि लंबे समय तक सपोर्टिंग रोल करने वाला अभिनेता भी सही कहानी और किरदार मिलने पर फिल्म को अपने कंधों पर संभाल सकता है।
छोटे रोल को भी बना देते हैं यादगार
दीपक डोबरियाल के करियर की सबसे खास बात यही है कि उन्होंने Supporting Role को कभी छोटा नहीं समझा।ओमकारा का राज्जू हो, तनु वेड्स मनु का पप्पी जी, हिंदी मीडियम का श्याम प्रकाश या सेक्टर 36 का इंस्पेक्टर राम चरण पांडे—हर किरदार का व्यक्तित्व अलग है।उन्होंने अपने अभिनय से यह साबित किया कि किसी फिल्म में अभिनेता का महत्व सिर्फ उसके स्क्रीन टाइम से तय नहीं होता। सही कलाकार कुछ मिनटों की मौजूदगी में भी दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ सकता है।
निजी जीवन को रखा काफी निजी
दीपक डोबरियाल अपने निजी जीवन को मीडिया की चकाचौंध से काफी दूर रखते हैं। उनकी पत्नी और बच्चे को लेकर सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी ही सामने आती रही है।अपने इंटरव्यू में वे अक्सर अपने संघर्ष और थिएटर के अनुभवों का जिक्र करते रहे हैं। अभिनय के प्रति उनकी सोच में थिएटर की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण दिखाई देती है।
सहायक भूमिकाओं से बनी अपनी अलग पहचान
दीपक डोबरियाल का सफर इस बात की मिसाल है कि मुख्य अभिनेता होना और बड़ा अभिनेता होना एक ही बात नहीं है।उन्होंने थिएटर से मिले अनुभव को फिल्मों में इस्तेमाल किया और हर किरदार को उसकी जरूरत के अनुसार निभाया। कॉमेडी में दर्शकों को हंसाने से लेकर गंभीर और नेगेटिव किरदारों में प्रभावित करने तक, उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता के कई रंग दिखाए हैं।उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि वे किसी फिल्म के पोस्टर पर सबसे आगे न होते हुए भी कहानी के भीतर अपनी मजबूत जगह बना लेते हैं।यही वजह है कि दीपक डोबरियाल को सिर्फ एक कॉमेडी या सपोर्टिंग एक्टर के रूप में देखना उनके लंबे और बहुआयामी करियर को सीमित करके देखना होगा। उनकी पहचान आज एक ऐसे वर्सेटाइल कैरेक्टर एक्टर की है, जो छोटे से छोटे किरदार में भी अपनी अलग छाप छोड़ सकता है।
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