November 4, 2026 12:29 am

ज्योतिरादित्य सिंधिया : राजनीतिक सफर और केंद्रीय मंत्री बनने तक की कहानी

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का चित्र

ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया भारतीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। ग्वालियर के ऐतिहासिक सिंधिया राजपरिवार से संबंध रखने वाले ज्योतिरादित्य ने वर्ष 2002 में अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। कांग्रेस के टिकट पर गुना लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे सिंधिया ने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2020 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होना उनके राजनीतिक जीवन का बड़ा मोड़ रहा। जून 2024 से वे केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म 1 जनवरी 1971 को मुंबई, महाराष्ट्र में हुआ था। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया और माधवी राजे सिंधिया के पुत्र हैं। उनका परिवार ग्वालियर के ऐतिहासिक सिंधिया राजघराने से जुड़ा है। उनके दादा जीवाजीराव सिंधिया ग्वालियर रियासत के अंतिम शासक थे, जबकि उनकी दादी विजयाराजे सिंधिया भारतीय राजनीति की प्रभावशाली हस्तियों में शामिल थीं।
उनके पिता माधवराव सिंधिया ने राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 30 सितंबर 2001 को एक विमान दुर्घटना में उनके निधन के बाद ज्योतिरादित्य ने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। उनका विवाह प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया से हुआ है। उनके दो बच्चे हैं—महाआर्यमन सिंधिया और अनन्या राजे सिंधिया।

शिक्षा और शैक्षणिक योग्यता

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुरुआती शिक्षा मुंबई के कैंपियन स्कूल और देहरादून के दून स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में अध्ययन किया। उच्च शिक्षा के लिए वे अमेरिका गए, जहां हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की।  आगे उन्होंने स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस से पढ़ाई की और वर्ष 2001 में MBA की डिग्री प्राप्त की। अर्थशास्त्र और प्रबंधन की उनकी शिक्षा ने उनके व्यक्तित्व को शैक्षणिक आधार दिया।

राजनीतिक सफर की शुरुआत

वर्ष 2001 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। पिता माधवराव सिंधिया के निधन के बाद गुना लोकसभा सीट खाली हुई थी। फरवरी 2002 में हुए उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में उन्होंने जीत दर्ज की और पहली बार लोकसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में भी गुना सीट से जीत हासिल की। लगातार चुनावी सफलताओं ने उन्हें मध्य प्रदेश में कांग्रेस के प्रमुख युवा नेताओं में स्थापित किया।

केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में जिम्मेदारियां

लोकसभा पहुंचने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्र सरकार में कई जिम्मेदारियां मिलीं। वर्ष 2007 में उन्हें संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री बनाया गया। वर्ष 2009 में उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री के रूप में काम किया। अक्टूबर 2012 में उन्हें बिजली मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया। इन पदों पर रहते हुए उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों के प्रशासनिक और नीतिगत कार्यों में भाग लिया। इस दौरान उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर एक सक्रिय युवा नेता के रूप में बनी।

2019 का चुनाव और कांग्रेस से इस्तीफा

वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। लगातार चार चुनाव जीतने के बाद उन्हें गुना सीट पर भाजपा उम्मीदवार कृष्ण पाल सिंह यादव से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद मार्च 2020 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया। 10 मार्च 2020 को उन्होंने इस्तीफा दिया और 11 मार्च को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उनके साथ मध्य प्रदेश के कई समर्थक विधायकों ने भी कांग्रेस और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।
इस घटनाक्रम से तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ की कांग्रेस सरकार बहुमत के संकट में आ गई। 23 मार्च 2020 को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और उसी दिन शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस तरह सिंधिया का पार्टी परिवर्तन मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम बन गया।

भाजपा में नई भूमिका और केंद्रीय मंत्री का सफर

भाजपा में शामिल होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को नई राजनीतिक जिम्मेदारियां मिलीं। जून 2020 में वे मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुने गए। जुलाई 2021 में उन्हें केंद्र सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया। जुलाई 2022 में उन्होंने इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली। फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए चलाए गए ऑपरेशन गंगा के तहत उन्हें रोमानिया में निकासी प्रयासों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। जून 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान उन्हें केंद्रीय संचार मंत्री और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री बनाया गया। इन मंत्रालयों के माध्यम से वे दूरसंचार क्षेत्र और पूर्वोत्तर राज्यों के विकास से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

2024 लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत

वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा के उम्मीदवार के रूप में गुना सीट से मैदान में उतरे। उन्होंने कांग्रेस के राव यादवेंद्र सिंह यादव को बड़े अंतर से हराया। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, सिंधिया को 9,23,302 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी को 3,82,373 वोट प्राप्त हुए। इस प्रकार उन्होंने 5,40,929 मतों के अंतर से जीत दर्ज की और लोकसभा में वापसी की।

खेल और शिक्षा संस्थानों से जुड़ाव

राजनीति के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया का जुड़ाव खेल और शिक्षा संस्थानों से भी रहा है। वे मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) के अध्यक्ष रह चुके हैं। इसके अलावा वे सिंधिया स्कूल और सिंधिया कन्या विद्यालय के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से भी जुड़े रहे हैं। उनका संबंध माधव इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस और सम्राट अशोक टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट, विदिशा जैसे संस्थानों से भी रहा है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण बदलावों से होकर गुजरा है। वर्ष 2002 में लोकसभा पहुंचने, कांग्रेस में केंद्रीय मंत्री बनने, 2019 में चुनाव हारने और 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने 2024 में गुना से बड़ी जीत हासिल की। आज केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण बनी हुई है।

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