November 2, 2026 4:54 pm

नीरज चोपड़ा: छोटे से गांव से ओलंपिक चैंपियन बनने तक का सफर

ओलंपिक स्वर्ण पदक के साथ भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा

भारतीय एथलेटिक्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाले खिलाड़ियों में नीरज चोपड़ा का नाम सबसे प्रमुख है। हरियाणा के एक छोटे से गांव से निकलकर ओलंपिक चैंपियन बनने तक का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास की मिसाल है। टोक्यो ओलंपिक 2020 में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने भारतीय खेल इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। इसके बाद विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और डायमंड लीग में शानदार प्रदर्शन ने उनकी पहचान दुनिया के शीर्ष भाला फेंक खिलाड़ियों में स्थापित की। नीरज चोपड़ा की उपलब्धियां केवल पदकों तक सीमित नहीं हैं। वर्ष 2025 में 90 मीटर का आंकड़ा पार करना उनके करियर का एक और ऐतिहासिक पड़ाव रहा।

नीरज चोपड़ा: प्रारंभिक जीवन और परिवार

नीरज चोपड़ा का जन्म 24 दिसंबर 1997 को हरियाणा के पानीपत जिले के खांद्रा गांव में हुआ था। उनके पिता सतीश चोपड़ा किसान हैं और माता सरोज देवी गृहिणी हैं। उनका बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता। शुरुआती दिनों में उनका झुकाव फिटनेस और शारीरिक गतिविधियों की ओर था, लेकिन धीरे-धीरे भाला फेंक के प्रति उनकी रुचि विकसित हुई। किशोरावस्था में वे अपनी फिटनेस सुधारने के लिए जिम जाने लगे। इसी दौरान शिवाजी स्टेडियम में भाला फेंक का अभ्यास कर रहे खिलाड़ियों को देखकर उनके मन में भी इस खेल को सीखने की इच्छा पैदा हुई। वर्ष 2010 के आसपास उन्होंने पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। सीमित संसाधनों और शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अभ्यास जारी रखा।

शिक्षा और खेल प्रशिक्षण

नीरज चोपड़ा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पानीपत के भारतीय विद्या निकेतन पब्लिक स्कूल से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में पढ़ाई की। आगे चलकर उन्होंने जालंधर स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से कला स्नातक (BA) की डिग्री पूरी की। उनके खेल करियर में प्रशिक्षण और तकनीक का विशेष महत्व रहा है। भाला फेंक जैसे खेल में केवल शारीरिक ताकत पर्याप्त नहीं होती, बल्कि गति, संतुलन, शरीर की लय और सही तकनीक भी जरूरी होती है। नीरज ने लगातार अभ्यास और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन से अपनी तकनीक को बेहतर बनाया।

खेल करियर की शुरुआत और पहला विश्व रिकॉर्ड

नीरज चोपड़ा की प्रतिभा जूनियर स्तर पर ही सामने आने लगी थी। वर्ष 2012 में लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 68.40 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता और जूनियर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। वर्ष 2015 में उन्होंने 81.04 मीटर का थ्रो दर्ज किया। इसके बाद वर्ष 2016 में पोलैंड के बिडगॉश्च में आयोजित विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 86.48 मीटर का शानदार थ्रो किया। इस प्रदर्शन के साथ वे स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने और जूनियर विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। यह उपलब्धि भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बड़ी सफलता थी।

2018: राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में दो स्वर्ण

वर्ष 2018 नीरज चोपड़ा के करियर का बेहद महत्वपूर्ण साल रहा। ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने 86.47 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित एशियाई खेलों में उन्होंने 88.06 मीटर का थ्रो किया और एक और स्वर्ण पदक हासिल किया। एशियाई खेलों में उनका यह प्रदर्शन उस समय राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बना। लगातार दो बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में स्वर्ण पदक जीतने से नीरज की पहचान भारतीय एथलेटिक्स के उभरते सितारे के रूप में मजबूत हुई।

टोक्यो ओलंपिक 2020: ऐतिहासिक स्वर्ण पदक

नीरज चोपड़ा के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में टोक्यो ओलंपिक का स्वर्ण पदक शामिल है। कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020 के ओलंपिक खेल 2021 में आयोजित हुए थे। 7 अगस्त 2021 को पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में 87.58 मीटर का थ्रो किया। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक जीत लिया। वे ओलंपिक में एथलेटिक्स का स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। इस ऐतिहासिक जीत ने देशभर में एथलेटिक्स के प्रति उत्साह बढ़ाया। नीरज चोपड़ा की सफलता ने छोटे शहरों और गांवों के युवाओं को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलों में करियर बनाने की प्रेरणा दी।

विश्व चैंपियनशिप और डायमंड लीग में शानदार प्रदर्शन

ओलंपिक स्वर्ण के बाद नीरज चोपड़ा ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी निरंतरता बनाए रखी।

  • 2022 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप: 88.13 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीता।
  • 2022 डायमंड लीग फाइनल: 88.44 मीटर के थ्रो के साथ खिताब अपने नाम किया। वे इस प्रतियोगिता को जीतने वाले पहले भारतीय बने।
  • 2023 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप: बुडापेस्ट में 88.17 मीटर का थ्रो कर स्वर्ण पदक जीता। वे इस प्रतियोगिता में भाला फेंक का स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय बने।
  • 2023 एशियाई खेल: 88.88 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया।

इन उपलब्धियों ने उन्हें विश्व एथलेटिक्स में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की श्रेणी में स्थापित किया।

पेरिस ओलंपिक 2024: एक और ओलंपिक पदक

पेरिस ओलंपिक 2024 में नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर भारत का प्रतिनिधित्व किया। क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने 89.34 मीटर का थ्रो कर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में उनका सर्वश्रेष्ठ थ्रो 89.45 मीटर रहा, जिसके दम पर उन्होंने रजत पदक जीता। पाकिस्तान के अरशद नदीम ने 92.97 मीटर के ओलंपिक रिकॉर्ड थ्रो के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया। टोक्यो में स्वर्ण और पेरिस में रजत जीतकर नीरज दो व्यक्तिगत ओलंपिक पदक हासिल करने वाले भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो गए।

2025: पहली बार 90 मीटर का आंकड़ा पार

नीरज चोपड़ा के करियर में वर्ष 2025 एक और बड़ी उपलब्धि लेकर आया। दोहा में आयोजित डायमंड लीग प्रतियोगिता में उन्होंने 90.23 मीटर का थ्रो किया और पहली बार 90 मीटर की सीमा पार की। हालांकि, इसी प्रतियोगिता में जर्मनी के जूलियन वेबर ने 91.06 मीटर का थ्रो कर उनसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बावजूद 90 मीटर का आंकड़ा पार करना नीरज के व्यक्तिगत करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इसी वर्ष बेंगलुरु में नीरज चोपड़ा क्लासिक का आयोजन भी हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे। हालांकि, 2025 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उनका पदक जीतने का सिलसिला आगे नहीं बढ़ सका।

भारतीय सेना में सेवा और व्यक्तिगत जीवन

नीरज चोपड़ा वर्ष 2016 में भारतीय सेना में शामिल हुए। उन्हें सेना के मिशन ओलंपिक्स विंग के अंतर्गत प्रशिक्षण का अवसर मिला और नायब सूबेदार का पद दिया गया। खेलों में उनके योगदान और उपलब्धियों के लिए उन्हें वर्ष 2018 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो नीरज चोपड़ा ने जनवरी 2025 में पूर्व टेनिस खिलाड़ी और कोच हिमानी मोर से विवाह किया। वे अपने खेल और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों के साथ लगातार सक्रिय रहते हैं।

Daily Insights | sports desk 

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