एन. चंद्रबाबू नायडू भारतीय राजनीति के प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं में शामिल हैं और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के अध्यक्ष हैं। वे वर्तमान में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और जून 2024 में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आंध्र प्रदेश सरकार की आधिकारिक प्रोफाइल में भी उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में दर्ज किया गया है। उनका राजनीतिक जीवन चार दशकों से अधिक लंबा है। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले नायडू ने कांग्रेस से विधायक और मंत्री बनने के बाद तेलुगु देशम पार्टी का रुख किया और आगे चलकर आंध्र प्रदेश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हुए।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
नारा चंद्रबाबू नायडू का जन्म 20 अप्रैल 1950 को आंध्र प्रदेश के नारावरिपल्ले गांव में हुआ था। उनका परिवार कृषि पृष्ठभूमि से जुड़ा था। उन्होंने तिरुपति में शिक्षा प्राप्त की और श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की। विश्वविद्यालय के दौरान ही उनकी रुचि राजनीति में बढ़ने लगी। उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और बाद में 1975 में यूथ कांग्रेस से जुड़े।
कांग्रेस से राजनीतिक शुरुआत
नायडू ने अपने चुनावी राजनीतिक सफर की शुरुआत कांग्रेस से की। 1978 में वे चंद्रगिरि विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पहली बार विधायक चुने गए। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री टी. अंजैया की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। उन्होंने तकनीकी शिक्षा और सिनेमैटोग्राफी सहित विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी संभाली। उस समय वे आंध्र प्रदेश के सबसे कम उम्र के विधायकों और मंत्रियों में शामिल थे।सिनेमैटोग्राफी मंत्री के रूप में काम करते हुए उनका संपर्क तेलुगु सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता एन. टी. रामाराव (NTR) से हुआ। बाद में उन्होंने एनटीआर की बेटी नारा भुवनेश्वरी से विवाह किया।
तेलुगु देशम पार्टी में प्रवेश
1982 में एन. टी. रामाराव ने तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की। 1983 के विधानसभा चुनाव में नायडू कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चंद्रगिरि से चुनाव लड़े, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने TDP में प्रवेश किया। TDP में आने के बाद संगठन और रणनीति से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका धीरे-धीरे बढ़ती गई। पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में उनकी सक्रियता ने उन्हें नेतृत्व के करीब पहुंचाया।
1995 में पहली बार मुख्यमंत्री
1 सितंबर 1995 को चंद्रबाबू नायडू पहली बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद उन्होंने 1999 में दोबारा सरकार बनाई और 1995 से 2004 तक लगातार मुख्यमंत्री रहे। आंध्र प्रदेश सरकार की आधिकारिक प्रोफाइल भी उनके 1995 से मुख्यमंत्री रहने और 1999 में दोबारा पद संभालने की जानकारी दर्ज करती है। उनके शुरुआती लंबे कार्यकाल के दौरान हैदराबाद को सूचना प्रौद्योगिकी और निवेश के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। HITEC City और आईटी क्षेत्र के विस्तार को उनके शासनकाल की प्रमुख पहलों में गिना जाता है।
इसी दौर में उन्हें तकनीक आधारित प्रशासन और ई-गवर्नेंस पर जोर देने वाले नेता के रूप में पहचान मिली
2004 से 2014: विपक्ष की राजनीति
2004 के विधानसभा चुनाव में TDP सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद नायडू ने लगभग एक दशक तक विपक्ष के नेता के रूप में काम किया। आंध्र प्रदेश की राजनीति में यह दौर उनके लिए विपक्ष में रहते हुए संगठन को बनाए रखने और पार्टी को दोबारा सत्ता में लाने की चुनौती का था।
2014 में फिर मुख्यमंत्री बने
आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद 2014 में राज्य के विभाजित हिस्से के लिए हुए चुनाव में TDP ने सत्ता हासिल की। 8 जून 2014 को नायडू ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वे विभाजन के बाद बने आंध्र प्रदेश के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री बने। इस कार्यकाल में अमरावती को नई राजधानी के रूप में विकसित करने की योजना पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके अलावा बुनियादी ढांचे, निवेश, शहरी विकास और तकनीक आधारित प्रशासन को सरकार की प्राथमिकताओं में रखा गया। हालांकि 2019 के विधानसभा चुनाव में TDP को हार मिली और नायडू मुख्यमंत्री पद से बाहर हो गए।
2024 में सत्ता में वापसी
2024 के विधानसभा चुनाव में TDP ने जनसेना पार्टी और BJP के साथ गठबंधन किया। चुनाव में गठबंधन को बड़ी सफलता मिली और 175 सदस्यीय विधानसभा में 164 सीटें गठबंधन के खाते में गईं—TDP ने 135, जनसेना ने 21 और BJP ने 8 सीटें जीतीं। इसके बाद 12 जून 2024 को नारा चंद्रबाबू नायडू ने चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। आंध्र प्रदेश सरकार की वर्तमान प्रोफाइल और जुलाई 2026 की प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक सूचना भी उन्हें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में दर्ज करती है।
तकनीक और विकास की राजनीति
चंद्रबाबू नायडू की राजनीतिक पहचान में तकनीक, निवेश, शहरी विकास और प्रशासन में डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। विशेष रूप से उनके 1990 के दशक के कार्यकाल में हैदराबाद में आईटी क्षेत्र को बढ़ावा देने की नीतियों ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान दिलाई। बाद के वर्षों में भी उन्होंने ई-गवर्नेंस, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डिजिटल सेवाओं को प्रशासन से जोड़ने पर जोर दिया। हालांकि उनके राजनीतिक सफर को केवल तकनीक और विकास के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं है। उनका करियर आंध्र प्रदेश की बदलती राजनीति, क्षेत्रीय दलों की भूमिका, गठबंधन राजनीति और राज्य के पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रमों से भी जुड़ा रहा है।
राजनीतिक जीवन की खास बातें
चंद्रबाबू नायडू के लंबे राजनीतिक सफर में कई महत्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं—
- 1978: पहली बार विधायक बने।
- 1980 के दशक: राज्य सरकार में मंत्री के रूप में काम किया।
- 1983 के बाद: तेलुगु देशम पार्टी से जुड़े।
- 1995: पहली बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
- 1995–2004: लगातार मुख्यमंत्री रहे।
- 2004–2014: विपक्ष के नेता के रूप में सक्रिय रहे।
- 2014: विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।
- 2019: विधानसभा चुनाव में TDP की हार के बाद सत्ता से बाहर हुए।
- 2024: TDP गठबंधन की जीत के बाद चौथी बार मुख्यमंत्री बने।
वर्तमान भूमिका
सितंबर 2026 तक चंद्रबाबू नायडू आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। वे राज्य सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की गठबंधन राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात भी आधिकारिक रूप से दर्ज की गई है।
नारा चंद्रबाबू नायडू का राजनीतिक सफर कांग्रेस के युवा नेता से लेकर तेलुगु देशम पार्टी के प्रमुख और आंध्र प्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री बनने तक का है। चार दशक से अधिक के सार्वजनिक जीवन में उन्होंने सत्ता, विपक्ष, गठबंधन और संगठन—राजनीति के अलग-अलग दौर देखे हैं। उनकी राजनीति में तकनीक, प्रशासन, विकास, क्षेत्रीय राजनीति और संगठनात्मक रणनीति प्रमुख विषय रहे हैं। आज भी वे आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
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