August 23, 2026 1:39 am

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: सरदार पटेल की विरासत और भारत की एकता का भव्य प्रतीक

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा

केवड़िया, गुजरात: नर्मदा नदी के किनारे स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। 182 मीटर (597 फीट) ऊंची यह विशाल प्रतिमा भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है। गुजरात के नर्मदा जिले में साधु बेट द्वीप पर बनी यह प्रतिमा सामने स्थित सरदार सरोवर बांध और विंध्याचल तथा सतपुड़ा पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बेहद आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करती है। यह स्मारक सरदार पटेल के राष्ट्र निर्माण, एकता और मजबूत भारत के विचारों को समर्पित है।

31 अक्टूबर 2018 को हुआ उद्घाटन

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 143वीं जयंती के अवसर पर किया गया था। इसका डिजाइन प्रसिद्ध भारतीय मूर्तिकार राम वी. सुतार ने तैयार किया। परियोजना को गुजरात सरकार द्वारा स्थापित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट (SVPRET) के माध्यम से विकसित किया गया।

प्रतिमा का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा किया गया, जिसमें स्टील फ्रेमिंग, कंक्रीट और कांस्य क्लैडिंग का इस्तेमाल किया गया। लगभग 46 महीनों में तैयार हुई यह प्रतिमा आधुनिक इंजीनियरिंग और भारतीय शिल्पकला का शानदार उदाहरण मानी जाती है।

182 मीटर की ऊंचाई का खास महत्व

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की ऊंचाई 182 मीटर रखी गई है। यह संख्या गुजरात विधानसभा की कुल सीटों की संख्या के अनुरूप है। प्रतिमा के अंदर 135 मीटर की ऊंचाई पर व्यूइंग गैलरी बनाई गई है। यहां एक समय में करीब 200 लोग पहुंच सकते हैं और वहां से सरदार सरोवर बांध, नर्मदा नदी और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है।

सरदार पटेल: भारत के एकीकरण के शिल्पकार

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों के कई आंदोलनों का नेतृत्व किया। खेड़ा सत्याग्रह, बारडोली आंदोलन और बोरसद आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। बारडोली आंदोलन की सफलता के बाद उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली। स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री बने। उन्होंने देश की विभिन्न रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी योगदान के कारण उन्हें आधुनिक भारत के एकीकरण के प्रमुख शिल्पकार के रूप में याद किया जाता है।

मजबूत इंजीनियरिंग का उदाहरण

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। उपलब्ध परियोजना जानकारी के अनुसार, यह प्रतिमा 180 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवा की गति को सहन करने में सक्षम है। इसे Seismic Zone IV के अनुरूप भूकंपरोधी संरचना के रूप में डिजाइन किया गया है। इसके निर्माण में लगभग 70,000 मीट्रिक टन सीमेंट, 6,000 मीट्रिक टन संरचनात्मक स्टील और 18,500 मीट्रिक टन रिइनफोर्समेंट बार का इस्तेमाल किया गया। प्रतिमा पर लगी कांस्य क्लैडिंग लगभग 8 मिलीमीटर मोटी है।

देशभर के लोगों की भागीदारी

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी परियोजना को देशभर से जोड़ने के लिए ‘लोहा अभियान’ चलाया गया था। इस अभियान के तहत विभिन्न गांवों से किसानों द्वारा इस्तेमाल किए गए कृषि उपकरण और मिट्टी एकत्र की गई। अभियान के दौरान 1,69,078 कृषि उपकरण और मिट्टी के नमूने एकत्र किए गए। इनमें से लगभग 134.25 मीट्रिक टन लोहा प्राप्त हुआ, जिसे आगे रिइनफोर्समेंट बार में बदला गया। देश के विभिन्न हिस्सों से लाई गई मिट्टी का इस्तेमाल ‘वॉल ऑफ यूनिटी’ बनाने के लिए किया गया।

पर्यटन का प्रमुख केंद्र

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास पर्यटन सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का भी विकास किया गया है। इसके आसपास वैली ऑफ फ्लावर्स, सरदार सरोवर बांध, शूलपाणेश्वर अभयारण्य, झरवानी जलप्रपात और राजपीपला जैसे आकर्षण मौजूद हैं। इस क्षेत्र को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय जनजातीय समुदायों के विकास, रोजगार, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी परियोजनाओं के केंद्र के रूप में भी विकसित किया गया है।

एकता और राष्ट्रनिर्माण का संदेश

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का महत्व केवल इसकी ऊंचाई तक सीमित नहीं है। यह एकता, देशभक्ति, राष्ट्रनिर्माण, सुशासन और सरदार पटेल की दृढ़ नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत की आधुनिक इंजीनियरिंग क्षमता और सरदार वल्लभभाई पटेल की ऐतिहासिक विरासत का संगम है। नर्मदा के किनारे खड़ी यह 182 मीटर ऊंची प्रतिमा आज भारत की एकता और अखंडता के संदेश को देश-दुनिया तक पहुंचाने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय स्मारक बन चुकी है।
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