निर्मला सीतारमण भारतीय राजनीति की प्रमुख महिला नेताओं में से एक हैं। वे भारत सरकार में वित्त मंत्री और कॉरपोरेट कार्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे देश की रक्षा मंत्री भी रह चुकी हैं। अर्थशास्त्र की शिक्षा प्राप्त निर्मला सीतारमण ने अपने राजनीतिक जीवन में संगठनात्मक जिम्मेदारियों से लेकर केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों तक का सफर तय किया है। केंद्रीय बजट प्रस्तुत करने और देश की आर्थिक नीतियों से जुड़े निर्णयों में उनकी भूमिका के कारण वे लगातार चर्चा में रहती हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
निर्मला सीतारमण का जन्म 18 अगस्त 1959 को तमिलनाडु के मदुरै में हुआ था। उनके पिता का नाम नारायण सीतारमण और माता का नाम सावित्री था। उनके पिता भारतीय रेलवे में कार्यरत थे। बचपन में उन्होंने तमिलनाडु के विभिन्न विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने तिरुचिरापल्ली स्थित सीतालक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज से वर्ष 1980 में अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली से वर्ष 1984 में अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और एमफिल की पढ़ाई पूरी की। अर्थशास्त्र की उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने आगे चलकर आर्थिक और नीतिगत विषयों में उनकी रुचि को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रारंभिक करियर और सामाजिक गतिविधियाँ
शिक्षा के बाद निर्मला सीतारमण कुछ समय के लिए ब्रिटेन गईं। वहाँ उन्होंने विभिन्न संस्थानों में काम किया। उन्होंने लंदन में एक होम डेकोर स्टोर में सेल्सपर्सन के रूप में काम करने के साथ कृषि इंजीनियर्स एसोसिएशन में अर्थशास्त्री की सहायक के रूप में भी सेवाएँ दीं। इसके अलावा उन्होंने प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स (PwC) में वरिष्ठ प्रबंधकीय भूमिका निभाई और कुछ समय तक बीबीसी वर्ल्ड सर्विस से भी जुड़ी रहीं। वर्ष 1991 में भारत लौटने के बाद उन्होंने हैदराबाद में सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी स्टडीज में उपनिदेशक के रूप में काम किया। वर्ष 2003 में उन्हें राष्ट्रीय महिला आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने 2005 तक कार्य किया। इस अनुभव ने उन्हें सामाजिक मुद्दों और सार्वजनिक नीति से जुड़े विषयों को समझने का अवसर दिया।
राजनीति में प्रवेश
निर्मला सीतारमण वर्ष 2006 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़ीं। वर्ष 2008 में उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान मिला। इसके बाद वर्ष 2010 में वे भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता बनीं और 2014 तक इस जिम्मेदारी को निभाया। प्रवक्ता के रूप में उन्होंने पार्टी की नीतियों और विचारों को सार्वजनिक मंचों पर प्रस्तुत किया। वर्ष 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद उन्हें वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय में भी कुछ समय तक राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। जून 2014 में वे आंध्र प्रदेश से राज्यसभा सदस्य चुनी गईं। वर्ष 2016 में वे कर्नाटक से राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुईं।
भारत की रक्षा मंत्री के रूप में भूमिका
3 सितंबर 2017 को निर्मला सीतारमण को भारत का रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। वे देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री बनीं। उनसे पहले इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाला था। उनके रक्षा मंत्री रहने के दौरान फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में हवाई कार्रवाई की। यह घटना भारत की सुरक्षा नीति और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण रही। रक्षा मंत्रालय में उनके कार्यकाल ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य मामलों से जुड़े प्रमुख निर्णयों के केंद्र में रखा।
वित्त मंत्री के रूप में जिम्मेदारी
30 मई 2019 को निर्मला सीतारमण को केंद्र सरकार में वित्त मंत्री और कॉरपोरेट कार्य मंत्री नियुक्त किया गया। वे भारत की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बनीं। उन्होंने 5 जुलाई 2019 को अपना पहला केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। वित्त मंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारियों में केंद्रीय बजट तैयार करना, सरकारी आय और व्यय का प्रबंधन, कर व्यवस्था, आर्थिक विकास तथा वित्तीय क्षेत्र से जुड़े निर्णय शामिल हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान वे सरकार की आर्थिक प्रतिक्रिया से संबंधित कार्यों में भी प्रमुख भूमिका में रहीं। महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार ने विभिन्न आर्थिक राहत और सहायता उपायों की घोषणा की। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार बनने पर उन्हें दोबारा वित्त मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। जुलाई 2025 में वे भारत की सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाली वित्त मंत्री बनीं। फरवरी 2026 में उन्होंने लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया। यह भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
व्यक्तिगत जीवन और सम्मान
निर्मला सीतारमण का विवाह वर्ष 1986 में परकला प्रभाकर से हुआ। उनकी एक बेटी हैं, जिनका नाम वांगमयी है और वे पत्रकार हैं। निर्मला सीतारमण का व्यक्तिगत जीवन शिक्षा, सार्वजनिक सेवा और राजनीतिक जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है। वर्ष 2019 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने उन्हें विशिष्ट पूर्व छात्रा सम्मान प्रदान किया। वर्ष 2021 में उन्हें इकोनॉमिक टाइम्स अवॉर्ड्स में ‘बिजनेस रिफॉर्मर ऑफ द ईयर’ सम्मान मिला। वर्ष 2025 में फोर्ब्स की विश्व की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में उन्हें 24वाँ स्थान दिया गया। निर्मला सीतारमण की यात्रा अर्थशास्त्र की पढ़ाई से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय कार्य अनुभव, सामाजिक गतिविधियों, पार्टी संगठन और केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों तक पहुँची है। रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री के रूप में उनकी भूमिकाएँ भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। केंद्रीय बजट, कर व्यवस्था और आर्थिक नीतियों से जुड़े उनके निर्णयों का प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था और नागरिकों पर पड़ता है। उनके सार्वजनिक जीवन का अध्ययन भारत की आर्थिक नीति और समकालीन राजनीति को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
POLITICAL DESK | DAILY INSIGHTS










