October 14, 2026 12:09 pm

एस. सोमनाथ : चंद्रयान-3 की सफलता के पीछे की प्रेरक कहानी

एस. सोमनाथ, ISRO के पूर्व अध्यक्ष और चंद्रयान-3 मिशन के समय के प्रमुख

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भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले वैज्ञानिकों में एस. सोमनाथ (S. Somanath) का नाम प्रमुख है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष के रूप में उन्होंने भारत के अंतरिक्ष अभियानों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। यह उपलब्धि भारत के वैज्ञानिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बनी।

 प्रारंभिक जीवन और परिवार

एस. सोमनाथ का जन्म जुलाई 1963 में केरल के अलप्पुझा जिले के थुरवूर में हुआ था। उनके पिता वी. श्रीधर पाणिकर हिंदी के शिक्षक थे और उनकी माता का नाम थंकम्मा था। बचपन से ही शिक्षा ने उनके जीवन में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उन्होंने अपनी पढ़ाई के माध्यम से तकनीकी ज्ञान हासिल किया और आगे चलकर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित की।

 शिक्षा और तकनीकी ज्ञान

एस. सोमनाथ ने सेंट ऑगस्टीन हाई स्कूल, अरूर से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और महाराजा कॉलेज, एर्नाकुलम से प्री-डिग्री की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने थंगल कुंजू मुसलियार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कोल्लम से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की, जिसमें उनकी विशेषज्ञता डायनेमिक्स और कंट्रोल थी। बाद में उन्होंने IIT मद्रास से पीएचडी भी प्राप्त की। उनकी तकनीकी शिक्षा ने उन्हें रॉकेट डिजाइन, प्रणोदन प्रणाली और प्रक्षेपण यान इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में काम करने के लिए मजबूत आधार दिया।

 ISRO में करियर की शुरुआत

वर्ष 1985 में एस. सोमनाथ ने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने भारत के प्रक्षेपण यान कार्यक्रमों में योगदान दिया और PSLV परियोजना के शुरुआती चरण से जुड़े रहे। अपने अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता के आधार पर उन्होंने धीरे-धीरे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2010 में वह जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-III (GSLV Mk III, जिसे बाद में LVM3 नाम दिया गया) परियोजना के निदेशक बने। इस भूमिका में उन्होंने भारत के भारी प्रक्षेपण यान के विकास से जुड़े कार्यों में योगदान दिया।

 LPSC और VSSC के निदेशक

जून 2015 में एस. सोमनाथ ने लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC) के निदेशक का पद संभाला। इस संस्थान का काम अंतरिक्ष प्रक्षेपण यानों की प्रणोदन प्रणालियों के विकास से जुड़ा है। उन्होंने जनवरी 2018 तक इस पद पर कार्य किया। इसके बाद उन्होंने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) के निदेशक के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इन पदों पर काम करते हुए उन्होंने तकनीकी अनुभव के साथ संगठनात्मक नेतृत्व की क्षमता भी विकसित की।

ISRO अध्यक्ष और चंद्रयान-3 की सफलता

जनवरी 2022 में एस. सोमनाथ ने ISRO के अध्यक्ष का पद संभाला। उनके कार्यकाल की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में चंद्रयान-3 मिशन की सफलता शामिल है। 23 अगस्त 2023 को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने चंद्रमा की सतह पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। इसके बाद प्रज्ञान रोवर ने चंद्र सतह पर वैज्ञानिक गतिविधियां कीं। इस सफलता के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश बना और चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाले देशों में चौथा देश बना। यह उपलब्धि एस. सोमनाथ सहित ISRO के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और पूरी टीम के सामूहिक प्रयास का परिणाम थी।

 आदित्य-L1 और गगनयान कार्यक्रम

एस. सोमनाथ के अध्यक्षीय कार्यकाल में भारत के अन्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष कार्यक्रमों को भी गति मिली। आदित्य-L1 मिशन को सूर्य के अध्ययन के लिए प्रक्षेपित किया गया। इसका उद्देश्य सूर्य की बाहरी परतों और सौर गतिविधियों का अध्ययन करना है। इसके साथ ही गगनयान कार्यक्रम में भी प्रगति हुई। यह भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता विकसित करना है।

ISRO के बाद की जिम्मेदारियां

एस. सोमनाथ ने 14 जनवरी 2025 को ISRO अध्यक्ष के रूप में अपना तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। उनके बाद वी. नारायणन ने यह जिम्मेदारी संभाली। उपलब्ध जीवनी जानकारी के अनुसार, इसके बाद एस. सोमनाथ ने बेंगलुरु स्थित चाणक्य विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2025 में उन्हें आंध्र प्रदेश सरकार का स्पेस टेक्नोलॉजी सलाहकार भी नियुक्त किया गया। एस. सोमनाथ का जीवन शिक्षा, तकनीकी विशेषज्ञता, निरंतर मेहनत और नेतृत्व का प्रेरणादायक उदाहरण है। एक इंजीनियर के रूप में करियर शुरू करके ISRO के अध्यक्ष तक पहुंचना और उनके कार्यकाल में चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता देखना उनकी यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।उनकी कहानी हमें सिखाती है कि बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियां ज्ञान, समर्पण, टीमवर्क और लगातार सीखते रहने से हासिल होती हैं।

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