November 5, 2026 4:57 pm

किरेन रिजिजू : अरुणाचल प्रदेश से केंद्रीय मंत्री बनने तक का राजनीतिक सफर

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू का आधिकारिक अंदाज में चित्र

अरुणाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाने वाले किरेन रिजिजू भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर अपने संसदीय सफर की शुरुआत की। इसके बाद गृह, खेल एवं युवा मामले, कानून एवं न्याय और पृथ्वी विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में जिम्मेदारियां निभाईं। जून 2024 में उन्हें केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री बनाया गया। उनका राजनीतिक सफर पूर्वोत्तर भारत के प्रतिनिधित्व, संसदीय सक्रियता और केंद्र सरकार में अलग-अलग मंत्रालयों की जिम्मेदारियों से जुड़ा रहा है।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

किरेन रिजिजू का जन्म 19 नवंबर 1971 को अरुणाचल प्रदेश के नाखू गांव में हुआ था। उनका परिवार बौद्ध धर्म को मानता है। उनके पिता का नाम रिंचिन खारू और माता का नाम चिराई रिजिजू है। उनके पिता अरुणाचल प्रदेश की पहली विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रह चुके हैं। राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े पारिवारिक माहौल ने रिजिजू को कम उम्र से ही सार्वजनिक जीवन को समझने का अवसर दिया। अरुणाचल प्रदेश जैसे सांस्कृतिक विविधता और भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य से आने के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र के मुद्दे उनके राजनीतिक जीवन का अहम हिस्सा रहे हैं।

शिक्षा और कानूनी पृष्ठभूमि

किरेन रिजिजू ने उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली का रुख किया। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से कला विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और वर्ष 1998 में दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री हासिल की। कानून की शिक्षा ने उन्हें संविधान, न्यायिक व्यवस्था और विधायी प्रक्रियाओं की समझ दी। आगे चलकर जब उन्होंने केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री की जिम्मेदारी संभाली, तब न्यायिक नियुक्तियों और न्यायपालिका से जुड़े विषय उनके कार्यकाल के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे।

राजनीतिक करियर की शुरुआत और चुनावी सफर

किरेन रिजिजू वर्ष 2004 में पहली बार अरुणाचल पश्चिम लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इस जीत के साथ उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनानी शुरू की। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वर्ष 2014 में उन्होंने फिर जीत दर्ज की। इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी वे अरुणाचल पश्चिम से निर्वाचित हुए। इस तरह वे 2004, 2014, 2019 और 2024 में लोकसभा पहुंचे। वर्ष 2009 से 2014 के बीच का चुनावी अंतराल उनके राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।

केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में जिम्मेदारियां

गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री वर्ष 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद किरेन रिजिजू को गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया। इस जिम्मेदारी के साथ उनके राजनीतिक जीवन में राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक भूमिका का विस्तार हुआ।

खेल एवं युवा मामले और अल्पसंख्यक कार्य

वर्ष 2019 में उन्हें अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री और खेल एवं युवा मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान वे खेलों को प्रोत्साहित करने, खिलाड़ियों के विकास और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों के कामकाज से जुड़े रहे।

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री जुलाई 2021 में किरेन रिजिजू को केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री बनाया गया। इस पद पर उनका कार्यकाल न्यायिक नियुक्तियों और न्यायपालिका तथा कार्यपालिका के संबंधों को लेकर चर्चा में रहा। वर्ष 2022 में उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए और इस प्रक्रिया में सरकार की भूमिका को लेकर अपनी राय रखी। उनके बयानों पर कानूनी समुदाय और न्यायपालिका से जुड़े कई लोगों ने आलोचना भी की। मई 2023 में उन्हें कानून एवं न्याय मंत्रालय से हटाकर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई।

पृथ्वी विज्ञान से खाद्य प्रसंस्करण तक

वर्ष 2023 में रिजिजू ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का कार्यभार संभाला। बाद में वे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय से भी जुड़े। इन जिम्मेदारियों के दौरान उनका प्रशासनिक अनुभव कानून और गृह मामलों से आगे बढ़कर विज्ञान, मौसम तथा उद्योग से संबंधित क्षेत्रों तक विस्तृत हुआ।

2024 में संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री बने

10 जून 2024 को किरेन रिजिजू को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री बनाया गया। संसदीय कार्य मंत्रालय सरकार और संसद के बीच समन्वय स्थापित करने, संसद के सत्रों से जुड़े कामकाज और विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण और विकास से संबंधित योजनाओं तथा कार्यक्रमों पर काम करता है। 18वीं लोकसभा में वे अरुणाचल पश्चिम का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। पूर्वोत्तर भारत से आने वाले नेता के रूप में उनकी राष्ट्रीय राजनीतिक भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।

व्यक्तिगत जीवन

किरेन रिजिजू का विवाह वर्ष 2004 में जोराम रीना रिजिजू से हुआ। उनकी पत्नी ने दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज फॉर विमेन से शिक्षा प्राप्त की और अरुणाचल विश्वविद्यालय से स्वर्ण पदक हासिल किया। वे इतिहास की एसोसिएट प्रोफेसर रही हैं और ईटानगर के डेरा नातुंग राजकीय महाविद्यालय में अध्यापन से जुड़ी रही हैं।

विवाद और सार्वजनिक आलोचना

किरेन रिजिजू के राजनीतिक जीवन में न्यायपालिका और न्यायिक नियुक्तियों से जुड़े उनके बयान चर्चा और विवाद का विषय बने। वर्ष 2022 में उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। मार्च 2023 में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर भी आलोचना हुई।
इन बयानों के बाद न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बहस तेज हुई। इन घटनाओं को समझने के लिए संबंधित बयानों और विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाओं को उनके पूरे संदर्भ में देखना जरूरी है।

किरेन रिजिजू के राजनीतिक सफर के प्रमुख पड़ाव

  • 2004: पहली बार अरुणाचल पश्चिम से लोकसभा सांसद चुने गए।

  • 2014: लोकसभा में वापसी की और गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बने।

  • 2019: खेल एवं युवा मामले और अल्पसंख्यक मामलों से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं।

  • 2021: केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री बने।

  • 2023: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली।

  • 2024: लोकसभा चुनाव जीते और संसदीय कार्य तथा अल्पसंख्यक कार्य मंत्री बने।

अरुणाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे किरेन रिजिजू का सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरा है। अलग-अलग मंत्रालयों में काम करने के अनुभव ने उनकी राजनीतिक भूमिका को व्यापक बनाया है। वर्तमान में संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री के रूप में वे संसद के कामकाज और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े विषयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

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