हेमंत सोरेन झारखंड की राजनीति के प्रमुख आदिवासी नेताओं में शामिल हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे अलग-अलग चरणों में झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और नवंबर 2024 में विधानसभा चुनाव के बाद दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।हेमंत सोरेन की राजनीति मुख्य रूप से आदिवासी अधिकार, स्थानीय पहचान और झारखंड के क्षेत्रीय हितों से जुड़े मुद्दों के इर्द-गिर्द रही है। उनका राजनीतिक सफर राज्यसभा सदस्य से लेकर उपमुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री तक पहुंचा।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 को झारखंड के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनके पिता शिबू सोरेन झारखंड की राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में रहे हैं और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेताओं में शामिल हैं।हेमंत सोरेन ने पटना हाई स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने रांची स्थित बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया, हालांकि उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और सक्रिय राजनीति में आ गए।
राजनीति में शुरुआती कदम
हेमंत सोरेन का औपचारिक राजनीतिक सफर राज्यसभा सदस्य के रूप में शुरू हुआ। उन्होंने जून 2009 से जनवरी 2010 तक राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य किया।इसके बाद वे झारखंड विधानसभा पहुंचे और वर्ष 2009 में विधायक चुने गए। वर्ष 2010 से 2013 तक उन्होंने झारखंड के उपमुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्हें राज्य सरकार के कामकाज और प्रशासन का महत्वपूर्ण अनुभव मिला।
पहली बार मुख्यमंत्री बने
झारखंड की राजनीति में हेमंत सोरेन के लिए वर्ष 2013 एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। राष्ट्रपति शासन समाप्त होने के बाद उन्होंने 15 जुलाई 2013 को पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनकी सरकार को कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के समर्थन से सत्ता मिली थी। हालांकि उनका पहला कार्यकाल लंबे समय तक नहीं चला और दिसंबर 2014 के विधानसभा चुनाव में JMM को BJP के मुकाबले हार का सामना करना पड़ा।
नेता प्रतिपक्ष के रूप में भूमिका
2014 के विधानसभा चुनाव के बाद हेमंत सोरेन ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने तत्कालीन सरकार की कई नीतियों का विरोध किया। खास तौर पर आदिवासी जमीन और स्थानीय समुदायों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उनके राजनीतिक एजेंडे में प्रमुख रहे। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों का उन्होंने विरोध किया। इन मुद्दों ने झारखंड में आदिवासी अधिकारों और जमीन की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज किया।
2019 में सत्ता में वापसी
वर्ष 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में JMM, कांग्रेस और RJD के गठबंधन ने चुनाव में सफलता हासिल की। इसके बाद 29 दिसंबर 2019 को हेमंत सोरेन ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। दूसरे कार्यकाल में उनकी सरकार ने आदिवासी कल्याण, स्थानीय पहचान और सामाजिक योजनाओं को राजनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल किया।
2024: राजनीतिक संकट और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा
हेमंत सोरेन के राजनीतिक जीवन में वर्ष 2024 बेहद महत्वपूर्ण रहा। जनवरी 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनसे पूछताछ की। 31 जनवरी 2024 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और इसके बाद ED ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हेमंत सोरेन ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और गिरफ्तारी को राजनीतिक कार्रवाई बताया।उनके इस्तीफे के बाद चंपाई सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
जेल से बाहर आने के बाद फिर मुख्यमंत्री
लगभग पांच महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 28 जून 2024 को झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन को जमानत दे दी। रिहाई के बाद चंपाई सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और 4 जुलाई 2024 को हेमंत सोरेन ने दोबारा झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।यह उनके राजनीतिक जीवन का एक असाधारण दौर रहा, जिसमें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा, गिरफ्तारी, जमानत और फिर सत्ता में वापसी शामिल रही।
2024 विधानसभा चुनाव और फिर सत्ता
नवंबर 2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव हुए। चुनाव में JMM के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 56 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद हेमंत सोरेन को विधायक दल का नेता चुना गया और 28 नवंबर 2024 को उन्होंने लगातार अगले कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस जीत के साथ झारखंड की राजनीति में JMM और हेमंत सोरेन की स्थिति और मजबूत हुई।
आदिवासी अधिकार और स्थानीय पहचान
हेमंत सोरेन की राजनीति में आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों को विशेष महत्व मिला है। वे लंबे समय से आदिवासी अधिकारों, जमीन की सुरक्षा और स्थानीय पहचान से जुड़े विषयों को प्रमुखता देते रहे हैं। मुख्यमंत्री के रूप में उनकी सरकार ने आदिवासियों के लिए अलग सरना धार्मिक कोड की मांग को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया। इसके अलावा 1932 के खतियान को आधार बनाकर स्थानीय निवासियों से संबंधित नीति को लेकर भी उनकी सरकार ने कदम उठाए।
राजनीतिक सफर: एक नजर में
- 10 अगस्त 1975: रामगढ़ जिले के नेमरा में जन्म
- 2009: पहली बार राज्यसभा पहुंचे
- 2009: झारखंड विधानसभा के सदस्य बने
- 2010–2013: झारखंड के उपमुख्यमंत्री
- 15 जुलाई 2013: पहली बार मुख्यमंत्री बने
- 2014–2019: नेता प्रतिपक्ष
- 29 दिसंबर 2019: दूसरी बार मुख्यमंत्री बने
- 31 जनवरी 2024: मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा और गिरफ्तारी
- 28 जून 2024: हाईकोर्ट से जमानत
- 4 जुलाई 2024: दोबारा मुख्यमंत्री बने
- 28 नवंबर 2024: विधानसभा चुनाव के बाद फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ
हेमंत सोरेन का राजनीतिक सफर झारखंड की क्षेत्रीय और आदिवासी राजनीति से गहराई से जुड़ा हुआ है। परिवार की राजनीतिक विरासत से शुरुआत करने के बाद उन्होंने राज्यसभा, विधानसभा, उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। मुख्यमंत्री के रूप में उनका सफर राजनीतिक उतार-चढ़ाव से भी भरा रहा। 2024 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा और गिरफ्तारी के बाद उनकी वापसी तथा उसी वर्ष विधानसभा चुनाव में गठबंधन की जीत ने उनके राजनीतिक सफर को एक महत्वपूर्ण मोड़ दिया।आज हेमंत सोरेन झारखंड की राजनीति में JMM के प्रमुख चेहरे और आदिवासी हितों से जुड़े प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।
व्यक्ति से व्यक्तित्व तक — Daily Insights










