Thursday, October 22, 2020
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ग्राउंड रिपोर्ट – गयाः विकास को तरसती मोक्ष भूमि, लोग खफा

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ज्ञान और मोक्ष की भूमि गया के पौराणिक वैभव के बावजूद पर्यटन के लिहाज से अपेक्षित विकास न हो पाने से यहां के लोग खफा हैं। इनका कहना है कि अगर सरकारों ने ध्यान दिया होता तो मगध क्षेत्र में पर्यटन से रोजगार के काफी अवसर पैदा हो सकते थे।

यहां के देवघाट पर गायों के झुंड के बीच कुछ लोग पिंडदान करने के लिए काफिले में फल्गू नदी तट की ओर जाते दिखते हैं। बचनू लाल पाठक कहते हैं, पितृ मुक्त तीर्थधाम में लोग बाहर से आते हैं। यहां ऐसा विकास होना चाहिए कि लोग आकर्षित हों। जितने लोग भी आते हैं वह बोधगया की बात करते हैं और वहीं से वापस चले जाते हैं। भगवान विष्णु की गया की बात कोई नहीं करता। प्लूरल्स पार्टी की प्रत्याशी और पेशे से शिक्षिका अलका सिंह गया शहर की गंदगी को दूर कराना चाहती हैं। वह कहती हैं, जो लोग गया आते भी हैं वो ऐसा अनुभव लेकर जाते हैं कि दोबारा आना न चाहें। शहर में वाशरूम नहीं हैं। गंदगी इतनी कि पूछिए भी मत। 

गया जिले की जनसंख्या करीब 43 लाख है और यहां कुल 10 विधानसभा सीटें हैं। ऐतिहासिक और पौराणिक होने के बावजूद गया को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल नहीं किया गया। जेनएनयू विवि से पढ़ाई फिर 25 साल जापान में रहने के बाद अपने शहर लौटे अदित्य कुमार विजय बखूबी समझाते हैं। आदित्य कहते हैं, गया के बारे में विदेशों में खूब नाम है, लेकिन हालत देखकर दु:ख होता है। पूरे एशिया से बोधगया में काफी पर्यटक आते हैं, जबकि यहां से 12 किमी दूर गया के विष्णुपद तीर्थ तक पर्यटक नहीं पहुंच पाते।

पितृपक्ष के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग

देवघाट पर ही भगवा कुर्ता पहने और माथे पर चंदन लगाए एक सज्जन बोलते हैं, हम जिस वर्ग से आते हैं उसने न सरकार से सहयोग लिया, न ही आरक्षण लिया। हमने सरकार को वोट, टैक्स और समर्थन इसलिए दिया कि हिंदूवादी विचारधारा से आते हैं। कोरोना के कारण पितृपक्ष पखवाड़े में रौनक नहीं रही। जब पंडा समाज के हजारों लोग दाने-दाने को मोहताज थे तो नेता सोशल डिस्टेंसिंग बना के दिल्ली-पटना में रह रहे थे। इसलिए विकास के लिए व्यवस्था को बदलना चाहिए।

बदलाव के लिए विकल्प नहीं

सुमित अहिरवाद कहते हैं, ज्ञान की भूमि में आज शिक्षा क्षेत्र विकसित नहीं है, सरकारी स्कूलों में टीचर नहीं हैं। पढ़ाई कैसे हो रही है उसका कोई जायजा लेने वाला नहीं। गया के ही गोकुल दुबे की राय है कि लोग इतिहास से सीखते हैँ, और उसे न दोहराना ही बुद्धिमानी है। बदलाव के लिए उसके एवज में कोई बढ़ के तो आना चाहिए। जिसे वोट दे सकें।

बोधगया में खूब चहल-पहल

गया शहर से करीब 12 किमी दूर बोधगया का नजारा काफी बदला-बदला सा नजर आता है। यहां मंदिरों के बाहर लगी लंबी लाइन लगी रहती है। तरह-तरह की दुकानें हैं। इस तीर्थस्थल में हमेशा चहल-पहल रहती है लेकिन जैसे ही बोधगया के क्षेत्र से बाहर निकलेंगे गंदगी के ढेर और अव्यवस्थाएं देखने को मिलेंगी। नालंदा से बोधगया आए एक बौद्ध भिक्षु बताते हैं, पूरे बिहार में ही अलग-अलग दिक्कतें हैं, लेकिन जो सबसे बड़ी समस्या है वो शिक्षा की है। वहीं, गया में रहने वाले युवराज नई दिल्ली में सीए की तैयारी कर रहे हैं। लॉकडाउन में वापस लौटे युवराज कहते हैं, सबसे पहले शिक्षा को सही करना पड़ेगा। पहले हमारे यहां की नालंदा विवि काफी प्रसिद्ध था। लेकिन उसी धरती पर आज शिक्षा बदहाल है।

मेला न लगने से पंडा समाज खफा

पितृपक्ष में हर बार गया में होने वाला मेला इस बार कोरोनाकाल में न होने से यहां के लोगों की कमर टूट गई है।  गया के लोगों की जीविका और आमदनी का जरिया पितृपक्ष मेला ही है। पंडा समाज के लोगों की नाराजगी इस बात से हैं कि अगर चुनाव हो सकते थे तो मेला क्यों नहीं लगने दिया। इस पर कृषि मंत्री प्रेम कुमार कहते हैं कि चुनाव तो आयोग का फैसला था, इस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं। युवा रवि कुमार कहते हैं कि चुनाव के बाद नेता अंतरध्यान हो जाते हैं। यहां हर ओर अधूरे काम हैं।आज नेता हमसे मिल रहे हैं, लेकिन आठ महीने से लॉकडाउन में किसी ने हाल तक नहीं पूछा, न ही कोई आया।

पर्यटन के क्षेत्र में बहुत कामः प्रेम

गया क्षेत्र के विकास के लिए उपेक्षा के आरोप पर यहां की राजनीति पर पिछले 30 साल से काबिज बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार कहते हैं, गया में पर्यटन के क्षेत्र में काफी काम हुआ है और आगे चल भी रहा है। बड़े  पर्यटकों के लिए हमने कानून का राज स्थापित किया है। पर्यटनस्थलों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है। प्रेम कुमार की टक्कर कांग्रेस प्रत्याशी मोहन श्रीवास्तव से है।

गया के साथ भेदभाव हुआः मोहन

कांग्रेस प्रत्याशी मोहन श्रीवास्तव ने आरोप मढ़ा कि जदयू सरकार ने पूरी तरह से गया से भेदभाव किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य की सुविधा नहीं है। यहाँ तक इस ज्ञान और मोक्ष की भूमि को स्मार्ट सिटी में भी शामिल नहीं किया। हमने डिप्टी मेयर रहते हुए जो संभव था, गया जी के लिए किया। शमशान घाट से लेकर सड़क तक सब पर काम किया। सत्ता में आए तो गया के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

‘Remember what this country can be’: Obama stumps for Biden in swing state Pennsylvania – live

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The conversations among the president and senior aides stem in part from their disappointment that Wray in particular but [attorney general William Barr] as well have not done what Trump had hoped — indicate that Democratic presidential nominee Joe Biden, his son Hunter Biden, or other Biden associates are under investigation, these people say. Like others, they spoke on the condition of anonymity to disclose internal discussions.

In the campaign’s closing weeks, the president has intensified public calls for jailing his challenger, much as he did for Hillary Clinton, his opponent in 2016. Trump has called Biden a “criminal” without articulating what laws he believes the former vice president has broken.

People familiar with the discussions say that Trump wants official action similar to the announcement made 11 days before the last presidential election by then-FBI Director James B. Comey, who informed Congress he had reopened an investigation into Clinton’s use of a private email server while she was secretary of state after potential new evidence had been discovered.

13703 रेलकर्मियों में बंटेंगे 24.59 करोड़, शनिवार तक बैंक खातों में पहुंच जाएगा बोनस

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  • 24.59 Crore Will Be Distributed Among 13703 Railway Employees, Bonus Will Reach Bank Accounts By Saturday

रतलाम14 मिनट पहले

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  • सरकार के घोषणा करते ही रेलवे के लेखा विभाग ने शुरू कर दी तैयारी, प्रत्येक कर्मचारी को 17951 रुपए मिलेंगे, रात को आया आदेश

दीपावली बोनस को लेकर आखिरकार कर्मचारियों की जीत हुई। मंगलवार के प्रदर्शन को देखते हुए बुधवार को सरकार को झुकना पड़ा। प्रत्येक कर्मचारी को 17951 रुपए बोनस मिलेगा। घोषणा होते ही केंद्रीय खासकर रेलवे के कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। उधर मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के लेखा विभाग में दोपहर को घोषणा होने के बाद से ही बोनस बांटने की तैयारी प्रारंभ कर दी है। रात 8.30 बजे रेलवे बोर्ड से आदेश भी आ गए हैं। इस बार मंडल के 13703 कर्मचारियों लगभग 24.59 करोड़ का बोनस बंटेगा। बोनस देने की घोषणा नहीं होने से कर्मचारी संगठन खासकर वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन और वेस्टर्न रेलवे मजदूर संघ खासा नाराज था। दोनों ही संगठनों ने मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन कर 22 अक्टूबर से ट्रेनों के चक्काजाम करने की चेतावनी दी थी। इसका असर बुधवार को देखने को मिला। बोनस की घोषणा होते ही कर्मचारियों में मिठाई खाने-खिलाने का दौर देर रात तक चलता रहा। वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन के मीडिया प्रभारी अशोक तिवारी ने बताया कि वेस्टर्न रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने स्टेशन परिसर स्थित कार्यालय में जश्न मनाया। मंडल मंत्री मनोहर बारठ ने सहायक मंडल मंत्री नरेंद्र सिंह सौलंकी, रंजीता वैष्णव सहित सभी साथियों को मिठाई खिलाई। वेरेमसं पदाधिकारियों ने भी कार्यालयों में जाकर कर्मचारियों को बधाई दी।

तीसरे साल नंबर वन बनने की तैयारी

सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो हर बार की तरह दशहरे से पहले शनिवार को ही बोनस के रुपए रेलकर्मियों के बैंक खातों में पहुंच जाएंगे। ऐसा हो गया तो इस बार भी मंडल देश में सबसे पहले बोनस बांटने वाले मंडल बन जाएगा। लेखा विभाग पूरी तरह तैयार है। बोनस समय पर बांटने के लिए कर्मचारियों को शनिवार और रविवार को भी ड्यूटी पर आदेश के निर्देश दे दिए गए हैं। हालांकि 2019 में दशहरे (8 अक्टूबर) के 15 दिन पहले 23 सितंबर को और 2018 में दशहरे (19 अक्टूबर) के छह दिन पहले 13 अक्टूबर को ही रेलवे ने बोनस बांट दिया था।

^ बोनस तो कर्मचारियों का अधिकार था, इसलिए सरकार को देना था। यह 2019-20 की उत्पादकता के आधार पर मिलना था। पहले घोषणा करना थी। मनोहर सिंह बारठ, मंडल मंत्री-वेरेएयू ^विरोध नहीं करते तो शायद सरकार इस बार बोनस नहीं देती। देर से ही सही सरकार ने कर्मचारी हित में निर्णय लिया है। गुड्स लोडिंग से रेलवे ने काफी कमाई की है, इसलिए बोनस तो बनता ही था। दीपक भारद्वाज, सहायक मंडल मंत्री-वेरेमसं

Exclusive: Alleged Hunter Biden Emails Circulated in Ukraine as Rudy Giuliani Dug for Dirt There Last Year

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Explicit photos and emails purportedly belonging to Hunter Biden were circulating in Ukraine last year at the same time that Rudy Giuliani was searching for dirt there on former Vice President Joe Biden, two people approached about the material during that period tell TIME.

The emails’ alleged availability, which has not been previously reported, comes to light in the wake of Giuliani’s recent claims that he obtained private photos and emails of Hunter Biden from a broken laptop abandoned in Delaware. Giuliani, who is President Donald Trump’s personal lawyer, has passed this material to right-wing news outlets, which began publishing it last week. Giuliani did not respond to requests for comment on the origins of the material he obtained.

Over the past year, the practice of selling or leaking private communications has become so common in Ukraine that the government has announced plans to pass a law against it. Igor Novikov, a former adviser to Ukraine’s President who now researches disinformation, referred to the practice as Ukraine’s “national sport” in a recent interview with the Washington Post.

The two people who said they were approached with Hunter Biden’s alleged emails last year did not know whether any of them were real and they declined to identify who was behind the offers, the first of which came in late May 2019 and the second in mid-September 2019. The two people said they could not confirm whether any of the material presented to them was the same as that which has been recently published in the U.S.

Last week the New York Post began publishing the material they obtained from Giuliani, and the sources and authenticity of the published emails has been hotly debated ever since. Hunter Biden and his father’s presidential campaign have declined to comment on the leaks in detail or to address whether any of the published emails are genuine. Hunter Biden has been unable to figure out where the material could have originated, says a person familiar with the situation.

Over the past week, Trump has used the leaks from Giuliani to fuel his claims of corruption against the Biden family. The President called on Attorney General William Barr to appoint a special prosecutor to investigate the material in the recent reports. “We’ve got to get the attorney general to act,” Trump said in an interview with Fox on Tuesday, two days before he faces Biden in the final debate of the presidential race. “He’s got to appoint somebody. This is major corruption, and this has to be known about before the election.”

One mystery that has surrounded Giuliani’s effort to aid Trump’s re-election bid is the original source of the photos and emails he has leaked to the New York Post. No other news organization has been able to verify the contents of the leak. The Biden campaign, along with U.S. national security officials and social media platforms, have warned that the leaked files could include forgeries meant to confuse or mislead voters in the final weeks of the campaign. Experts on disinformation have also raised serious concerns about the leaks.

The two people who said they were approached about Hunter Biden’s photos and emails last year did not know whether they originated from the same source as those that Giuliani has since leaked to the media. When the New York Post first published photos of Hunter Biden last week, “It brought back memories of the same information that was being introduced to us a year ago,” says the first person informed about the existence of this material.

Rudy Giuliani listens as President Trump speaks during a news briefing at the White House in Washington, D.C., on Sept. 27, 2020.

Salwan Georges—The Washington Post/Getty Images

In an interview with TIME, a second person described an offer that was made to him in Kyiv, Ukraine’s capital, in mid-September 2019. This person declined the offer, he says, and only recalled it in detail when familiar-looking material was published in the New York Post last week. This person alleges that the people offering this material had a buyer in mind for it: they said they wanted to sell it to Republican allies of President Trump. Their asking price was $5 million, he says, adding: “I walked away from it, because it smelled awful.”

In its first report about Hunter Biden on Oct. 14, the New York Post published what it described in a headline as a “smoking gun email” dated April 2015 between Hunter Biden and an adviser to Burisma Holdings, the Ukrainian gas company where Hunter Biden held a lucrative board seat while his father was Vice President. The email, whose authenticity could not be independently confirmed, appeared to suggest that the adviser, Vadym Pozharskyi, had met and “spent some time” with Joe Biden, thanks to an introduction from Hunter Biden. If the alleged meeting took place, it would seem to undercut the repeated claims from Biden and his son that they never discussed Burisma.

The Biden campaign has denied that any such meeting happened. Amos Hochstein, who served as an adviser to Joe Biden on Ukrainian affairs in 2015, said the then-Vice President did not attend a meeting with Pozharskyi. “He never met with Biden. Never,” Hochstein tells TIME.

During his travels in Europe last year, Giuliani met with a variety of Ukrainian politicians, businessmen and former law enforcement officers whom he has since described as “whistleblowers” and witnesses to the Biden family’s alleged corruption in Ukraine. None of the accusations these sources made via Giuliani has stood up to public scrutiny, and no evidence has emerged of wrongdoing by Joe Biden in Ukraine.

When TIME asked Novikov, the former adviser to Ukraine’s President, about the alleged offers of access to Hunter Biden’s emails, Novikov said it would be “nothing new” for someone in Ukraine to market such material. The trade in kompromat—a Russian word for “compromising material”—has gone into overdrive in Ukraine since last year, when the country became entangled in internal U.S. politics, especially during the impeachment inquiry against President Trump, Novikov says. Various political operatives have rushed to answer Giuliani’s call for dirt on the Bidens, creating what Novikov called a “catalyst for disinformation.” Any documents emerging from this trade should be treated with caution, he adds, because they are “extremely hard to verify, yet very easy to fake.”

Since the New York Post began publishing the purported emails and photos of Hunter Biden, federal investigators have tried to determine where the emails came from and whether they are linked to a foreign effort to influence the U.S. elections, according to an NBC News report published Oct. 15.

At the end of last year, Russia’s military intelligence service, known as the GRU, hacked into the computer systems of Burisma, the Ukrainian gas company, apparently aiming to steal its internal documents and communications, according to a report released by cyber security experts in January. “It is significant because Burisma Holdings is publicly entangled in U.S. foreign and domestic politics,” wrote the experts from Area 1, a cyber security firm that was co-founded by a former hacker for the U.S. National Security Agency. The January report warned that the hack of Burisma could be an “early warning” of Russia’s plans to interfere in the 2020 elections using the same techniques it used in 2016.

During a trip to Ukraine in December, Giuliani met with a Ukrainian lawmaker who has since been identified by the U.S. Treasury Department as an “active Russian agent” with longstanding ties to Russian intelligence services. The lawmaker, Andrii Derkach, did not respond to messages seeking comment.

In a social media post on Monday, Derkach claimed that the “scandalous investigation” published in the New York Post would soon have a sequel based on a “second laptop” purportedly containing the private emails and photos of Hunter Biden. “The facts confirming international corruption are stored on a second laptop,” Derkach wrote. “These are not the last witnesses or the last laptop.”

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फोटोग्राफर्स ने कैद की अलग-अलग देशों की सड़कों पर लोगों की ऐसी LIFE, तस्वीरें देख चौंधिया जाएंगी आंखें

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बांग्लादेश में ढाका की सड़क पर खींची गई
बांग्लादेश में ढाका की सड़क पर खींची गई ‘द आइज़’ नाम की तस्वीर (फोटो क्रेडिट- Mithail Afrige Chowdhury , द इंडिपेंडेंट फोटो, Instagram)

हम आपके लिए इस प्रतियोगिता (contest) में शामिल प्रतिभागियों (contestents) की ऐसी ही सहज और पल-पल बदलते समय की तलाश करने वाली तस्वीरों को लेकर आये हैं. इन अविश्वसनीय रूप से प्रतिभाशाली कलाकारों (talented artists) के काम को देखिये और निर्णय कीजिये, कौन सी आपको सबसे अच्छी लगी


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    October 21, 2020, 8:48 PM IST

‘द इंडिपेंडेंट फ़ोटोग्राफ़र’ (The Independent Photographer) नाम के फ़ोटोग्राफ़ी के शौकीनों और फ़ोटोग्राफ़रों (photographers) के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क (international network) ने सितंबर 2020 में होने वाली अपनी स्ट्रीट फ़ोटोग्राफ़ी प्रतियोगिता (Street Photography contest) के विजेताओं की घोषणा की है. इस फ़ोटो प्रतियोगिता का उद्देश्य सड़कों (strtotoeets) पर चल रहे जीवन को सबसे पारखी नज़रों से देखने के लिए फोटोग्राफ़रों की सराहना और उन्हें पुरस्कृत (reward) करना था.

रिचर्ड कलवार, जो इस प्रतियोगिता के जज (judge) थे, वे 1944 में पैदा हुए थे. वह एक अमेरिकी फोटोग्राफर हैं जो 1977 से मैग्नम फोटोज के सदस्य हैं. कलवार की तस्वीरें (photos) अक्सर वास्तविकता और बेहिचक होकर विसंगति को दिखाती हैं. हम आपके लिए इस प्रतियोगिता (contest) में शामिल प्रतिभागियों (contestents) की ऐसी ही सहज और पल-पल बदलते समय की तलाश करने वाली तस्वीरों को लेकर आये हैं. इन अविश्वसनीय रूप से प्रतिभाशाली कलाकारों (talented artists) के काम को देखिये और निर्णय कीजिये, कौन सी आपको सबसे अच्छी लगी-

‘निज़वा, ओमान में बकरियों की नीलामी’ शीर्षक वाली यह तस्वीर माउडे बार्डेट ने खींची है. इसे 1000 अमेरिकी डॉलर का पहला पुरस्कार मिला.

ढाका, बांग्लादेश की इस ‘द आइज़’ नाम की इस तस्वीर को मिथाइल अफ्रीगे चौधरी नाम के फोटोग्राफर ने खींचा है. इसे 600 अमेरिकी डॉलर का दूसरा पुरस्कार मिला.

लंदन, यूनाइटेड किंगडम में खींची गई ‘रेड गर्ल’ नाम की यह फोटो फ्रांसेस्को जियोइया ने खींची है. इस तस्वीर ने 400 डॉलर का तीसरा पुरस्कार जीता.

अलेक्जेंद्रा अवलोनितिस की ‘मार्चर्स, सेंट पैट्रिक्स डे परेड’ नाम की यह तस्वीर अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी में खींची गई है. प्रतियोगिता में इसे अंतिम चरण में शामिल किया गया.

जिसेपे सिरिलो की खींची गई भारतीय रेल में बैठे एक विचारमग्न आदमी की यह फोटो बिना किसी शीर्षक के है. इसे भी प्रतियोगिता में अंतिम चरण में स्थान मिला.

जॉनी मार्टिनेज़ की ‘माइक’ शीर्षक वाली यह तस्वीर शंघाई, चीन में क्लिक की गई है. इसमें एक बुजुर्ग जेंटलमैन सिगरेट पी रहे हैं और उनकी बेल्ट पर लिखा हुआ है ‘माइक’. इस तस्वीर को भी प्रतियोगिता में अंतिम चरण में शामिल किया गया.

लुनिंगो काओ की क्लिक की इस तस्वीर का शीर्षक है एग पिकर. चीन में क्लिक की गई यह तस्वीर जियांग्सु प्रांत के नानजिंग की है. जहां पर बत्तख के पुराने अंडे खरीदते एक व्यक्ति की परछाई को देखा जा सकता है. इस तस्वीर को भी प्रतियोगिता में अंतिम चरण में शामिल किया गया.

पाउल केसेल की सोहो शीर्षक वाली यह तस्वीर अमेरिकी की न्यूयॉर्क सिटी में क्लिक की गई है. यह तस्वीर भी फोटोग्राफी प्रतियोगिता की अंतिम दौर की एंट्रियों में शामिल रही है.

प्रतियोगिता के अंतिम दौर में यह तस्वीर भी शामिल रही है. इसे क्लिक करने वाले फोटोग्राफर हैं, स्टीफेन टेलर. तस्वीर को नाम दिया गया है, ‘ब्रोकेन होम- बाराबडोस.’ तस्वीर में बाथशेबा, बाराबडोस एक एक व्यक्ति को एक छोड़े गये घर के किनारे चलते हुए देखा जा सकता है.

बांग्लादेशी फोटोग्राफर सुजोन अधिकारी की इस फोटो का नाम है “शैडो टेल्स मेनी टेल्स”. प्रतियोगिता की अंतिम प्रविष्टियों में यह तस्वीर भी शामिल रही.

जितनी बेहतरीन ये तस्वीरे हैं, लगता है कि सभी को विनर घोषित कर दिया जाना चाहिए. फिर भी आपको मौका मिले तो आप इनमें से किसे विनर बनाना चाहेंगे.

President calls for calm after protesters shot in Nigeria

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Following a night of violence which sparked global outrage, eyewitnesses say the city descended into chaos on Wednesday.

Videos posted on social media and local television coverage showed a number of buildings on fire, including the Lagos Theater and at least one bank branch. Some police stations were also attacked, and video also showed the High Court of Lagos on fire.

Human rights group Amnesty International said that after an on-the-ground investigation it had found that twelve people were killed during protests in two locations in Lagos on Tuesday.

It said that “evidence gathered from eyewitnesses, video footage and hospital reports” confirmed that over a period of about two hours “the Nigerian military opened fire on thousands of people who were peacefully calling for good governance and an end to police brutality.”

Why Nigerians are protesting police brutality

The army has dismissed reports that protesters were shot dead as “fake news.” The Nigerian Army and police did not return requests for comment.

Eyewitnesses told CNN shots rang out during a peaceful protest at the Lekki toll gate in Lagos as activists chanted the national anthem and asked for police brutality to end.

Daily protests have been held across the country for close to two weeks, over widespread claims of kidnapping, harassment, and extortion by a police unit known as the Special Anti-Robbery Squad (SARS).

Eyewitnesses told CNN that a number of protesters were killed by security forces.

Akinbosola Ogunsanya, a talk show host on Afrosurge Radio, said the shooting began shortly after the lights at the tollgate were switched off. “Members of the Nigerian army pulled up on us and they started firing,” he said. “I just survived, barely.”

CNN couldn’t independently corroborate the witness accounts.

Multiple witnesses told CNN they saw the army take the bodies away.

Protesters in Lagos on Tuesday.Protesters in Lagos on Tuesday.

Christopher Yakubu, 27, who told CNN he fell and injured his leg while trying to escape the gunfire, showed CNN a video of his injury. “I heard rapid shots. I couldn’t count them. I counted 5 bodies,” he said. “Later I saw that the Nigerian Army took the bodies in their own van. We couldn’t take videos,” he said.

Another protester also said he witnessed the bloodshed.

“They killed more than 7 people and got away with their bodies to cover up evidences,” said Deji Jokodola.

On Tuesday, Lagos state governor Babajide Sanwo-Olu imposed a 24-hour curfew and deployed anti-riot police to the city.

In a televised statement on Wednesday morning, Gov. Sanwo-Olu insisted nobody had been killed at Lekki toll gate: “Whilst we pray for the swift recovery of the injured, we are comforted that we have not recorded any fatality.”

Later in the day, he tweeted that one person had died at Reddington Hospital due to “blunt force trauma” to the head. He said it was an isolated case and said he was investigating whether the dead person was a protester. CNN reached out to the Governor’s office, but did not receive a reply.

Eyewitness reports

The Governor’s comments directly contradict statements from several eyewitnesses who said they had seen multiple casualties at the protest.

Speaking to CNN from the scene of the shooting, Temple Onanugbo said he saw “multiple bodies laying on the ground,” when he arrived to help those injured. He said he heard what he believed were bullets being fired from his home nearby and that the sound lasted “for about 15 to 30 minutes.”

Protesters gather at the front of Alausa, the Lagos State Secretariat.Protesters gather at the front of Alausa, the Lagos State Secretariat.

“I was on Instagram Live when the shooting started,” Henry Pundit, a filmmaker, told CNN. “They were coming to us with multiple gun shots. We went on the ground and held our flag. We were crying, some were running.”

Eyewitnesses said the violence continued into Wednesday morning, and that it appeared to have spread beyond the original protest site.

Franklin Alex spoke to CNN while hiding in his home in Ebute Metta, about 9km (10 miles) from the Lekki toll gate. He said the police had been on his street earlier on Wednesday morning, and that three people had been killed. He added that officers at four police stations nearby were firing at protesters.

“The police are shooting at people that are not armed, though some of them have bottles and stones, but the police are using very sophisticated weapons on them,” he said. “They are moving from street to street, I could count about 17 of them, all armed, all shooting.”

24-hour curfew imposed on Lagos amid anti-police brutality protests in Nigeria24-hour curfew imposed on Lagos amid anti-police brutality protests in Nigeria
Amnesty International Nigeria tweeted that it had received “credible but disturbing evidence” of “excessive use of force occasioning deaths of protesters.”

Gov. Sanwo-Olu asked for all forms of protest to end immediately and ordered an investigation into the incident. “Yesterday’s events were no doubt some of the darkest gradients of our history as a state and as a people,” he said.

Earlier on Tuesday, the governor imposed a 24-hour curfew on Lagos — which has an estimated population of more than 20 million people — including the closure of all its schools.

The lockdown means that only essential service providers and first responders have permission to be on the streets.

SARS was disbanded on October 11 and a new police unit to replace it will be trained by the International Committee of the Red Cross (ICRC), Reuters reported Sunday.

Protesters are demanding further protections against the police, including independent oversight and psychological evaluation of officers.

International condemnation

On Wednesday, US Democratic presidential candidate Joe Biden urged President Buhari and the Nigerian military to halt “the violent crackdown on protesters in Nigeria which has already resulted in several deaths.”

UK Foreign Secretary Dominic Raab said he was “deeply concerned by the recent violence and continued clashes in Nigeria,” and “alarmed by widespread reports of civilian deaths.”

“We call for an end to violence,” Raab added. “The Nigerian government must urgently investigate reports of brutality at the hands of the security forces and hold those responsible to account.”

Former US Secretary of State Hillary Clinton urged Buhari to do something to end the violence. “I’m calling on @mbuhari and the @hqnigerianarmy to stop killing young #EndSARS protesters. #StopNigeriaGovernment,” she said in a tweet.

Protesters gather at Alausa Secretariat in Ikeja, Lagos State.Protesters gather at Alausa Secretariat in Ikeja, Lagos State.

Manchester United’s Nigerian soccer player Odion Ighalo said he was “ashamed of this government” in an Instagram post. “I’m calling on the UK government, calling all those leaders in the world to please see what is going on in Nigeria and help us.”

Death and severe injuries amid the protests have been reported since the weekend.

Videos on social media show dozens of cars belonging to protesters burning, which Amnesty International Nigeria confirmed on Twitter.

“While we continue to investigate the killings, Amnesty International wishes to remind the authorities that under international law, security forces may only resort to the use of lethal force when strictly unavoidable to protect against imminent threat of death or serious injury,” the human rights group tweeted.

Sports stars take to social media to condemn police brutality in NigeriaSports stars take to social media to condemn police brutality in Nigeria

Other videos show a mass breakout of hundreds of prisoners from the Benin Correctional Center in Edo state in southern Nigeria. It is uncertain who is to blame for the breakout, with protesters claiming it was staged by police. The Nigeria police force said in a tweet that protesters carted away arms and ammunition from the armory before freeing suspects in custody and setting the facilities alight.

Edo state governor Godwin Obaseki imposed a curfew on Monday, tweeting about “disturbing incidents of vandalism and attacks on private individuals and institutions by hoodlums in the guise of #EndSARS protesters.”

Riot police have been deployed across the country. According to a tweet from the Nigerian police force on Tuesday evening, the Inspector-General of Nigeria’s Police has ordered the immediate nationwide deployment of anti-riot police officers “to protect lives and property of all Nigerians and secure critical national infrastructure across the country.”

कर्ज लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?

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पंचकुला की एक शांत-सी कॉलोनी में रहने वाले संदीप विज को इस साल वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि लॉकडाउन के कारण उनकी आय तो कम हो गई, पर ऋण के भुगतान से जुड़ी उनकी प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आई। 52 साल के संदीप पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं। लॉकडाउन के कारण ड्राई क्लिनिंग यूनिट तथा कुरियर एजेंसी के उनके दोनों कारोबार ठप हो गए, जिससे उन्हें अपने परिवार के साथ अधिक वक्त गुजारने को मिला। मगर कर्ज तथा कर्मचारियों के वेतन के बोझ ने उन्हें वित्तीय परेशानी में डाल दिया। वह अब अपने कर्जों को व्यवस्थित करना चाहते हैं, ताकि फिर कभी ऐसी स्थिति से न गुजरना पड़े।

समझदारी से लें कर्ज : आदर्श रूप में हम सब यही चाहते हैं कि हमारे पास जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन हो। लेकिन हकीकत में अक्सर हमें अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कर्ज लेने पड़ते हैं। पहले कर्ज लेने को सामाजिक बुराई के तौर पर देखा जाता था। पर अब काफी कुछ बदल गया है। आज छुट्टियों में घूमने जाने से लेकर मकान खरीदने तक के के लिए कर्ज उपलब्ध हैं। ईएमआई संस्कृति ने उत्पाद की लागत और सेवा के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है। कई तरह के कर्ज : कर्ज लेने में तब तक कोई बुराई नहीं है, जब तक आपको इसके संभावित परिणामों का एहसास हो। आम तौर पर दो तरह के लोन होते हैं, एक है संपत्ति निर्माण से संबंधित और दूसरा संपत्ति के क्षरण से संबंधित। मकान खरीदने या शिक्षा के लिए जब आप कर्ज लेते हैं, तो यह संपत्ति निर्माण से संबंधित कर्ज हुआ, वहीं जब आप कोई नया फोन लेने या छुट्टियां बिताने के लिए कर्ज लेते हैं, तो यह संपत्ति के क्षरण से संबंधित कर्ज हुआ। 

जब आप अपने रहने के लिए मान लीजिए कि तीस लाख रुपये का मकान खरीदते हैं, तो इस तरह आप अपने लिए संपत्ति का निर्माण भी कर रहे होते हैं, भविष्य में जिसकी कीमत बढ़ने की संभावना होती है। इससे किराये की बचत भी होती है। इसी तरह से जब आप एजुकेशन लोन लेते हैं, तो आप रोजगार की अपनी संभावनाओं को बेहतर कर रहे होते हैं। इन दोनों तरह के कर्जों के एवज में आप कर में छूट का दावा भी कर सकते हैं, जिससे कर्ज की लागत कुछ कम हो जाती है। इसके विपरीत जब आप कर्ज से कोई कार खरीदते हैं, तो शोरूम से कार के बाहर निकलते ही उसका मूल्यह्रास होना शुरू हो जाता है। जबकि आपको कर्ज का भुगतान तो कार की कीमत के आधार पर करना होता है। यही बात मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कर्ज पर खरीदी या फिर छुट्टियां बिताने या किसी और जरूरत के लिए पर्सनल लोन लेने पर भी लागू होती है। इसका यह मतलब नहीं है कि संपत्ति के क्षरण से संबंधित सारे कर्ज खराब ही होते हैं। यदि कर्ज पर खरीदी गई कार से रोजगार में मदद मिलती है और आपकी आय में बढ़ोतरी होती है, तो फिर यह गलत नहीं है। 

कर्जदारों के लिए सबक : संदीप विज को अपने सारे लोन बकाए और ईएमआई तथा ब्याज भुगतान सहित सूची बनाकर यह जानना चाहिए कि ऊंची ब्याज दरों वाले लोन कौन से हैं। आपको ईएमआई के भुगतान में मुश्किल आ रही हो, तो कारोबार से संबंधित लोन के बारे में कर्जदाता बैंक से बात करनी चाहिए। बैंक और कर्ज देने वाली एजेंसियां लोन को रिस्ट्रक्चर करने को तैयार होती हैं।

कर्ज के संबंध में कुछ टिप्स –

(1) कर्ज तभी लें जब कोई और विकल्प न हो।

(2)आपके सारे लोन की कुल ईएमआई आपकी मासिक आय के चालीस फीसदी से अधिक न हो।

(3) समय पर ईएमआई चुकाएं। 

(4) आपात फंड बनाएं ताकि भविष्य में तीन-चार माह की ईएमआई चुकाई जा सके। 

(5) क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन जैसे ऊंची लागत वाले कर्ज को चुकाने में कोताही न करें। 

(6) कोशिश करें कि कर्ज सीमित अवधि के लिए हो, आवास ऋण 15 वर्ष से अधिक अवधि के लिए न हो।

 

पंचकुला की एक शांत-सी कॉलोनी में रहने वाले संदीप विज को इस साल वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि लॉकडाउन के कारण उनकी आय तो कम हो गई, पर ऋण के भुगतान से जुड़ी उनकी प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आई। 52 साल के संदीप पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं। लॉकडाउन के कारण ड्राई क्लिनिंग यूनिट तथा कुरियर एजेंसी के उनके दोनों कारोबार ठप हो गए, जिससे उन्हें अपने परिवार के साथ अधिक वक्त गुजारने को मिला। मगर कर्ज तथा कर्मचारियों के वेतन के बोझ ने उन्हें वित्तीय परेशानी में डाल दिया। वह अब अपने कर्जों को व्यवस्थित करना चाहते हैं, ताकि फिर कभी ऐसी स्थिति से न गुजरना पड़े।

समझदारी से लें कर्ज : आदर्श रूप में हम सब यही चाहते हैं कि हमारे पास जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन हो। लेकिन हकीकत में अक्सर हमें अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कर्ज लेने पड़ते हैं। पहले कर्ज लेने को सामाजिक बुराई के तौर पर देखा जाता था। पर अब काफी कुछ बदल गया है। आज छुट्टियों में घूमने जाने से लेकर मकान खरीदने तक के के लिए कर्ज उपलब्ध हैं। ईएमआई संस्कृति ने उत्पाद की लागत और सेवा के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है। कई तरह के कर्ज : कर्ज लेने में तब तक कोई बुराई नहीं है, जब तक आपको इसके संभावित परिणामों का एहसास हो। आम तौर पर दो तरह के लोन होते हैं, एक है संपत्ति निर्माण से संबंधित और दूसरा संपत्ति के क्षरण से संबंधित। मकान खरीदने या शिक्षा के लिए जब आप कर्ज लेते हैं, तो यह संपत्ति निर्माण से संबंधित कर्ज हुआ, वहीं जब आप कोई नया फोन लेने या छुट्टियां बिताने के लिए कर्ज लेते हैं, तो यह संपत्ति के क्षरण से संबंधित कर्ज हुआ। 

जब आप अपने रहने के लिए मान लीजिए कि तीस लाख रुपये का मकान खरीदते हैं, तो इस तरह आप अपने लिए संपत्ति का निर्माण भी कर रहे होते हैं, भविष्य में जिसकी कीमत बढ़ने की संभावना होती है। इससे किराये की बचत भी होती है। इसी तरह से जब आप एजुकेशन लोन लेते हैं, तो आप रोजगार की अपनी संभावनाओं को बेहतर कर रहे होते हैं। इन दोनों तरह के कर्जों के एवज में आप कर में छूट का दावा भी कर सकते हैं, जिससे कर्ज की लागत कुछ कम हो जाती है। इसके विपरीत जब आप कर्ज से कोई कार खरीदते हैं, तो शोरूम से कार के बाहर निकलते ही उसका मूल्यह्रास होना शुरू हो जाता है। जबकि आपको कर्ज का भुगतान तो कार की कीमत के आधार पर करना होता है। यही बात मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामानों की कर्ज पर खरीदी या फिर छुट्टियां बिताने या किसी और जरूरत के लिए पर्सनल लोन लेने पर भी लागू होती है। इसका यह मतलब नहीं है कि संपत्ति के क्षरण से संबंधित सारे कर्ज खराब ही होते हैं। यदि कर्ज पर खरीदी गई कार से रोजगार में मदद मिलती है और आपकी आय में बढ़ोतरी होती है, तो फिर यह गलत नहीं है। 

कर्जदारों के लिए सबक : संदीप विज को अपने सारे लोन बकाए और ईएमआई तथा ब्याज भुगतान सहित सूची बनाकर यह जानना चाहिए कि ऊंची ब्याज दरों वाले लोन कौन से हैं। आपको ईएमआई के भुगतान में मुश्किल आ रही हो, तो कारोबार से संबंधित लोन के बारे में कर्जदाता बैंक से बात करनी चाहिए। बैंक और कर्ज देने वाली एजेंसियां लोन को रिस्ट्रक्चर करने को तैयार होती हैं।

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(1) कर्ज तभी लें जब कोई और विकल्प न हो।

(2)आपके सारे लोन की कुल ईएमआई आपकी मासिक आय के चालीस फीसदी से अधिक न हो।

(3) समय पर ईएमआई चुकाएं। 

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(5) क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन जैसे ऊंची लागत वाले कर्ज को चुकाने में कोताही न करें। 

(6) कोशिश करें कि कर्ज सीमित अवधि के लिए हो, आवास ऋण 15 वर्ष से अधिक अवधि के लिए न हो।

 

<!– if((isset($story['custom_attribute']) && $story['custom_attribute']=='results') && (isset($story['custom_attribute_value']) && $story['custom_attribute_value']=='2020'))

10वीं और 12वीं बोर्ड का रिजल्ट सबसे पहले जानने के लिए नीचे दिए गए फॉर्म को भरें और अपना रजिस्ट्रेशन करवाएं।

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पोल्ट्री फार्म संचालक को पिस्तौल दिखाकर 59000 रुपये लूटे

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पोल्ट्री फार्म संचालक को पिस्तौल दिखाकर 59000 रुपये लूटे
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत: शहर के एटलस रोड पर पोल्ट्री फार्म संचालक को लुटेरों ने पिस्तौल दिखाकर 59000 रुपये लूट लिए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
आदर्श नगर निगवासी कमालुद्दीन पोल्ट्री फार्म चलाते हैं। वह ईदगाह कालोनी और डबल स्टोरी क्षेत्र में मुर्गों की सप्लाई करते हैं। वह साेमवार को मुर्गों के रुपये इकट्ठे करने दुकानों पर गए थे। रात को जब वह रुपये इकट्ठा करके वापस लौट रहे थे तो रोटरी क्लब के पास दो बाइक पर सवार चार बदमाशों ने उनको रोक लिया। सामने बाइक अड़ाकर लुटेरों ने जान से मारने की धमकी दी। दोनों लुटेरों ने रुपयों वाला थैला छीन लिया और भाग गए। भागते समय वह पोल्ट्री फार्म संचालक की बाइक की चाबी भी निकालकर ले गए। पुलिस बदमाशों को तलाश कर रही है।

पोल्ट्री फार्म संचालक को पिस्तौल दिखाकर 59000 रुपये लूटे
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सोनीपत: शहर के एटलस रोड पर पोल्ट्री फार्म संचालक को लुटेरों ने पिस्तौल दिखाकर 59000 रुपये लूट लिए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
आदर्श नगर निगवासी कमालुद्दीन पोल्ट्री फार्म चलाते हैं। वह ईदगाह कालोनी और डबल स्टोरी क्षेत्र में मुर्गों की सप्लाई करते हैं। वह साेमवार को मुर्गों के रुपये इकट्ठे करने दुकानों पर गए थे। रात को जब वह रुपये इकट्ठा करके वापस लौट रहे थे तो रोटरी क्लब के पास दो बाइक पर सवार चार बदमाशों ने उनको रोक लिया। सामने बाइक अड़ाकर लुटेरों ने जान से मारने की धमकी दी। दोनों लुटेरों ने रुपयों वाला थैला छीन लिया और भाग गए। भागते समय वह पोल्ट्री फार्म संचालक की बाइक की चाबी भी निकालकर ले गए। पुलिस बदमाशों को तलाश कर रही है।

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जमीनी विवाद में दबंगों ने की महिला की पिटाई, वीडियो वायरल|viral Videos in Hindi – हिंदी वीडियो, लेटेस्ट-ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी वीडियो में

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जमीनी विवाद में दबंगों ने की महिला की पिटाई, वीडियो वायरल|viral Videos in Hindi - हिंदी वीडियो, लेटेस्ट-ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी वीडियो में
चिंता के विचार आपकी ख़ुशी को बर्बाद कर सकते हैं। ऐसा न होने दें, क्योंकि इनमें अच्छी चीज़ों को ख़त्म करने की और समझदारी में निराशा का ज़हरीला बीज बोने की क्षमता होती है। ख़ुद को हमेशा अच्छा परिणाम पाने के लिए प्रोत्साहित करें और ख़राब हालात में भी कुछ-न-कुछ अच्छा देखने का गुण विकसित करें। ख़ास लोग ऐसी किसी भी योजना में रुपये लगाने के लिए तैयार होंगे, जिसमें संभावना नज़र आए और विशेष हो। भूमि से जुड़ा विवाद लड़ाई में बदल सकता है। मामले को सुलझाने के लिए अपने माता-पिता की मदद लें। उनकी सलाह से काम करें, तो आप निश्चित तौर पर मुश्किल का हल ढूंढने में क़ामयाब रहेंगे। किसी से अचानक हुई रुमानी मुलाक़ात आपका दिन बना देगी। काम के लिए समर्पित पेशेवर लोग रुपये-पैसे और करिअर के मोर्चे पर फ़ायदे में रहेंगे। सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है। जीवनसाथी के ख़राब व्यवहार का नकारात्मक असर आपके ऊपर पड़ सकता है। स्वयंसेवी कार्य या किसी की मदद करना आपकी मानसिक शांति के लिए अच्छे टॉनिक का काम कर सकता है। परेशान? आप पंडित जी से प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।

Inside Melania Trump’s unprecedented campaign trail absence

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A source who knows the first lady told CNN Melania Trump is doing what she often does: whatever she feels like.

“It is who she is,” says the friend and former administration official of Trump’s staying off the trail while other surrogates and family members tackle packed schedules in battleground states.

“She does what she wants, when she wants … She can be a contrarian,” another former White House staffer said.

The campaign has sought her presence. But with the election less than two weeks away and no scheduled events, it’s unlikely the first lady will engage in any significant way. This stands in stark contrasts to nearly all modern first ladies, many of who served a critical role in humanizing their husbands to women voters.

On Tuesday, citing an “abundance of caution” and a “lingering cough” after her bout with Covid-19, Trump backed out of a planned appearance with her husband to introduce him at a Pennsylvania rally.

It would have been the first lady’s first large-scale, public campaign event since June 2019. The rally would have also marked the first time the public had seen the first lady since September 29 in Ohio, where she attended the first presidential debate.

Melania Trump has never been comfortable in the public eye and campaign travel is not something she enjoys, a source who has worked with the first lady said. Trump prefers to stay home and be present for her son, Barron.

A source familiar with the first lady’s recuperation from Covid-19, which she was diagnosed with earlier this month, says Trump’s voluntary downtime is due to her illness.

“I’m not sure why she’s being criticized for taking care of herself and her son when they both tested positive for coronavirus,” says a White House official.

Frustration

Melania Trump cancels plans to attend Tuesday rally citing Covid recovery

Trump’s unwillingness to campaign or attend fundraisers has been an at times frustrating concept for members of the Trump campaign to swallow, according to two campaign sources, as having a first lady speak to voters is historically the most compelling and effective mode of surrogacy.

“It is certainly not a question of ‘Does the Trump campaign want Melania Trump to make appearances?’ ” a source familiar with campaign operations said. “She’s wanted and needed. It’s just that she doesn’t do them.”

Earlier this fall, when asked when the first lady would make campaign appearances, campaign spokesman Hogan Gidley said: “The first lady is an incredible asset to the country, the President and the campaign. We’re communicating with the first lady’s team to determine the best ways she can be involved moving forward.”

No events ever materialized.

CNN has reached out to Gidley for comment on any of the first lady’s potential events.

The first lady’s absence has been a point of discussion among some in campaign circles, however, the lack of participation is not particularly of concern for the President himself, according to someone familiar with how he has responded.

“He knows her well enough to know that when she doesn’t want to do something, it’s not like he or anyone else is going to change her mind,” the source said.

The White House referred requests for comment to the Trump 2020 campaign.

In 2016, the pleas for Melania Trump’s participation on the trail were just as consistent. Back then, she said her priority was caring for her then-10-year-old son. Trump was ostensibly given a pass as to why she did not make prolific speeches or headline fundraisers.

The occasional wave or brief greeting to throngs at a Trump rally became satisfactory for a campaign struggling to help voters understand who exactly their candidate was behind the scenes, something a spouse can deliver on during an election cycle.

“The answer to us asking her to make appearances was ‘no’ so many times, we eventually just stopped asking,” says someone who worked in a senior position on the 2016 Trump campaign. 2020 doesn’t appear to be all that different. “Anyone would take her, anytime. She’s a rock star,” says a source familiar with campaign strategy.

Hitting the trail?

Melania Trump details Covid illness and reveals son Barron contracted itMelania Trump details Covid illness and reveals son Barron contracted it

On Tuesday, after Trump’s abrupt cancellation, a source familiar with the first lady’s schedule told CNN there was no “rain date” given. On Wednesday, Trump’s chief of staff Stephanie Grisham told CNN that Trump does, in fact, have campaign dates on her calendar.

“She has plans to travel with the President and campaign solo next week,” Grisham said.

Making appearances next week, as Grisham says, will mean the first lady is doing so with one week or less until Election Day.

It could be a tight window for effectiveness.

“A lot of Americans have already voted but, as we’ve seen, much of this is a turnout game,” says Kate Andersen Brower, author of “First Women: The Grace and Power of America’s Modern First Ladies.” “So no, I don’t think it would be too late for her to have some impact if she went out now. She might be able to energize those Trump voters who are not as enamored with him now as they once were.”

Brower does note the historically unprecedented nature of Trump’s invisibility on the campaign trail.

“The only modern example that comes to mind is Jackie Kennedy who was pregnant during the campaign. Because she had had difficult pregnancies in the past she did not campaign much in 1960. Though she did magazine photo shoots and interviews when she could,” Brower said.

Trump has not done a solo magazine interview with an American publication during her tenure in the White House. Her last significant television interview occurred more than two years ago.

“Interviews are the same as campaigning,” said the friend and former administration official. “She’s picky about what she does and when or why she does it. It’s not for lack of public interest or requests, it’s that she doesn’t want to engage.”

When she does ultimately participate in a campaign event, the timing would follow the pattern she opted for in 2016, where she gave her longest speech to date, in Berwyn, Pennsylvania, just five days before the election and after a four-month hiatus from campaign appearances.

Her remarks included a message about communication: “We have to find a better way to talk to each other,” she said.